ट्रेन से मेरी पहली यात्रा।

हैलो veiwer नमस्कार आज में अपना पहला अनुभव आपके साथ शेयर कर रहा हूं।मेरा नाम अर्शान अल्वी है, और में अपनी यह कहानी हिंदी में  आप के सामने प्रस्तुत कर  रहा हूं। जैसा कि आप मेरे ब्लॉग पर भी देख सकते हो।


मेरा रंग गोरा है, कद 5 फीट 4 इंच है।मेरा एक छोटा भाई है,जो वैल्डिंग कॉन्ट्रैक्टर है।और उसके इस काम में मुझे भी मदद करनी पड़ जाती है।क्योंकि भाई ही भाई की मदद करता है।


दोस्तों इसलिए मेरे भाई ने मुझसे कहा कि भाई मेरा काम चल रहा है,और मुंबई से काम के लिए फोन आया है कि काम आकर देख लो,तो में वहां पर नहीं जा सकता।आप फ़्री हो आप चले जाओ मेंने आपका ट्रेन का रिज़र्वेशन करा दिया है।


 दोस्तों मेरा मन तो नहीं था लेकिन परिवार में और लोगों ने भी फोर्स किया तो जाने के लिए मैं मान गया।भाईयो में आपको बताना भूल गया कि मैं रामपुर यूपी से बिलोंग करता हूं। मैं रामपुर से रोडवेज बस पकड़कर दिल्ली पहुंच गया।हज़रत निज़ामुद्दीन स्टेशन से मेरी ट्रेन शाम के 4:30 बजे थी। मैं स्टेशन पर टीक 4:00बजे पहुंच गया।और अपनी ट्रेन के आने का इंतज़ार करने लगा।


ट्रेन के कोच एस 4 मे मेरी सीट नंबर 49 लोअर थी। टीक समय पर ट्रेन स्टेशन पर हॉर्न बजाती हुई पहुंची।और मेने पांच मिनट में अपना कोच दूंडकर अपनी सीट पर जाकर बैठ गया।ट्रेन को स्टेशन पर दस मिनट हो चुके थे,लेकिन मेरी सामने वाली सीट अभी भी खाली थी।ट्रेन हॉर्न बजाती हुई छूक़-छुक की आवाज के साथ धीरे -धीरे स्टेशन से चलने लगी।


 मैं ट्रेन की खिड़की पर जाकर खड़ा हुआ ही था,की मेरे कानो में एक लड़की की आवाज आई।मेंने पीछे मुड़कर दूसरी और देखा तो एक लड़की दौड़ती हुई ट्रेन के साथ भागी चली आ रही थी।मेंने खिड़की से उसकी और हाथ बढ़ाया तो उसने भी अपना हाथ मेरी और कर दिया।

मेंने उसका हाथ पकड़कर ट्रेन में खींच लिया।जब मैने उसे खींचा तो उसके स्तन मेरी छाती से टकरा गए।


जैसा कि दोस्तों आपने अक्सर हिंदी फिल्मों में देखा होगा ऐसा ही मेरे साथ हुआ।वो लड़की मुझे धन्यवाद बोलकर चली गई। मई का महीना था भीषड गर्मी थी।इसलिए मैं हवा लेने के लिए खुछ देर खिड़की पर ही खड़ा रहा।


करीब पांच मिनट के बाद मैं अपनी सीट पर गया तो देखकर में हैरान हो गया क्योंकि दोस्तों वह लड़की मेरी सामने वाली सीट पर ही बैठी थी। मैं अपनी सीट पर चुप चाप जाकर बैठ गया।शाम के करीब 7:00 बज चुके थे,और उस लड़की जो मेरे बिल्कुल सामने बैठी थी कोई बातचीत नहीं हुई।


फिर अचानक से उसने मुझसे बात की,कहा भैया अंधेरा हो गया है please light on कर दीजिए।जैसा उसने कहा मैने उसके कहे अनुसार वैसा ही कर दिया।उसने मुझे फिर धन्यवाद कहा।उसने मुझसे पूछा कि आप कहां जा रहे हो,मेंने बताया कि में मुंबई किसी काम से जा रहा हूं।


मेंने कहा की आप कहां जा रही हो तो उसने मुझे बताया कि मैं अपनी दीदी के यहां मुंबई जा रही हूं।दोस्तों फिर हमने खूब बातें की क्योंकि हम कुछ ही पलों में बहुत अच्छे दोस्त जो बन गए थे।बाते करते-करते बहुत रात हो चुकी थी,इसलिए हम दोनों good night बोलकर सोने चले गए।सुबह करीब 8:00 बजे हम दोनों उठे और फ्रेश होकर बैठ गए।


इतने में ही ट्रेन में चाय वाला आ गया चिल्लाते हुए की चाय ले लो चाय।मेंने दो चाय ली एक मेंने अपने लिए और दूसरी चाय मेने उस लड़की के लिए जिसका नाम अर्पिता था,जो मेने रात को ही उसी से मालूम किया था।अर्पिता बहुत ही खूबसूरत थी।


उसका कटिला बदन मदहोश कर रहा था,लेकिन मैं अपने आप को सम्हाले हुआ था।उसका साईज कोई 32,34,28 था,जो किसी भी लड़के को मदहोश करने के लिए काफी था।फिर उसने अचानक से मुझे हिलाया क्योंकि में उसके कामुक शरीर के बारे में सोच रहा था। मैं एक दम से छड़ बड़ाया और पूछा की क्या हुआ उसने कहा कि कहां खो गए आप, मेंने अपने आप को सम्हालते हुए जबाब दिया कि नहीं कही नहीं।


उसने कहा कि मेरा स्टेशन आ गया है। मुझे जाना होगा हम इतने अच्छे दोस्त बन गए है, तो आप मुझे अपना नंबर दीजिए।मेंने उसे अपना नंबर दिया और वह मेरा नंबर लेकर "हैलो" बोलकर चली गई।


 अगला स्टेशन मेरा था जो करीब दस मिनट के बाद आना था।उसके जाने के बाद मैं उदास होकर बैठा था,तभी ट्रेन के रुकने की आवाज मेरे कानो को सुनाई दी और में हड़बड़ा कर सीधा बैठा।ट्रेन रुकी और मैं स्टेशन पर उतर गया।मुंबई के गोरे गांव स्टेशन पर उतरकर मैं बाहर की ओर गया। 


और स्टेशन के गेट पर जाकर रुका। गेट के पास एक पान की दुकान थी,जिस पर से मेने एक सिगरेट लिया और उसको जलाकर फूंकने लगा। फिर थोड़ी देर सिगरेट फूंकने के बाद में वहां से उस तरफ निकला जहां मुझे काम के सिलसिले में जाना था।


कोई आधा घंटा ऑटो में सफर करने के बाद मैं उस जगह पहुंचा।वहां पर पहुंचकर मैं उनसे मिला जिन साहब ने मुझे काम देखने के लिए बुलाया था। मैं वहां का काम निबटा कर ऑटो पकड़कर वापस जा रहा था,की मेरे फोन की घंटी बजी मेने फोन निकालकर देखा तो एक अंजान नंबर था।


बात करी तो पता चला कि वो फोन उसी लड़की का है,जो की ट्रेन मे मिली थी।उसने मिलने के लिए आग्रह किया कि वो आपसे एक बार मिलना चाहती है। मेंने भी उसे हां कह दिया और उसके बताए पते पर चल दिया।जब मैं वहां पर पहुंचा तो वह गेट पर खड़ी थी। उसने कहा कि वो तुम्हारा ही इंतेज़ार कर रही थी।


उसकी दीदी घर पर नहीं है,फोन पर बात हुई तो दीदी ने बताया कि वो तीन दिन के बाद आयेगी।इसलिए मैने तुम्हे बुलाया की हम आपस में आराम से बात कर सके।और वो मुझे अपने घर में अंदर ले गई।उसके बाद उसने जो किया वो में आज तक नहीं भुला पाया क्योंकि उसने ऐसा किया, जिसे याद कर में आज भी रोमांटिक हो जाता हूं।


दोस्तों सोचने वाली बात नहीं है।उसने मेरे साथ सेक्स किया वो भी ऐसा जिसे मैं आज भी याद कर लेता हूं तो मुझे अर्पिता की याद आ जाती है। तो दोस्तो यह थी मेरी ट्रेन की सुखद यात्रा जिसका मेंने विस्तार से वर्णन किया है।अगर मेरी यह कहानी आपको भाइयों पसंद आयी हो तो प्लीज़ शेयर करो और लाईक करो एंड कॉमेंट जरूर करना।

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