जानिए हमदर्द कंपनी के मालिक कौन है। और इनके उत्पाद के बारे में।

आज हम बात करने वाले हैं। हमदर्द कंपनी के मालिक के बारे में आप लोगों को पता नहीं होगा कि हमदर्द कंपनी जो पूरे भारत में प्रसिद्ध है। अपने उत्पादों की वजह से हमदर्द कंपनी के उत्पाद संपूर्ण भारत में प्रसिद्ध है। जैसे शाफी जो दाग- धब्बे और खून साफ करने का काम करती है। दूसरा उत्पाद है, रूह अफजा जिसका प्रयोग करने पर गर्मी में energy प्राप्त होती है। और शरीर में तरो ताजगी मिलती है। हमदर्द लैबोरेट्रीज भारत में यूनानी और आयुर्वेदिक दवा कंपनी है। ब्रिटेन से भारत की स्वतंत्रता के बाद हमदर्द युनानी शाखाएं बांग्लादेश और पाकिस्तान में स्थापित की गई थी। 


लेकिन बाद में उसे दिल्ली में हकीम हाफिज अब्दुल मजीद ने स्थापित किया था। और 1948 में वक्फ यानी गैर-लाभकारी ट्रस्ट बन गया था। इसके कुछ सबसे प्रसिद्ध product में शरबत रूह अफजा, शाफी, रोगन बादाम शीरी, सुआलीन, जोशीना और सिंकारा शामिल है। यह हमदर्द फाउंडेशन धर्म वाले शैक्षिक ट्रस्ट के साथ जुड़ा हुआ है।


हमदर्द लैबोरेट्रीज की स्थापना सन 1906 दिल्ली में हुई थी। हकीम हाफिज अब्दुल मजीद ने सन1906 में हमदर्द कंपनी की स्थापना की थी। हकीम हाफिज अब्दुल मजीद और यूनानी चिकित्सक अंसारलु कबाली ने की थी। हमदर्द का उर्दू अर्थ है,  पीड़ा का साथी, यानी दुख का साथी अब्दुल मजीद की मृत्यु के बाद उनके बेटे हकीम अब्दुल हमीद ने 14 वर्ष की आयु में ही हमदर्द लैबोरेट्रीज के कार्यभार को संभाला।और इस तरह अब्दुल हमीद हकीम साहब के नाम से जाना जाने लगा। हकीम अब्दुल माजिद का जन्म 1883 में भारत के पेलवेट में शेख रहीम बख्श के यहां हुआ था। कहा जाता है कि हकीम अब्दुल मजीद कुरान शरीफ को पढ़ने में बहुत अच्छे थे। 


और उन्होंने उर्दू और फारसी भाषाओं का गहन अध्ययन किया। इसके बाद उन्होंने यूनानी प्रणाली में हाई लेवल की डिग्री हासिल की।

हकीम हाफिज अब्दुल मजीद साहब हकीम जमाल खान साहब के कांटेक्ट में आये जो जड़ी बूटियों में बहुत गहरी दिलचस्पी रखते थे। और अपनी औषधीय पौधों की पहचान करने के लिए जाने जाते थे। अपनी पत्नी से सलाह लेने के बाद अब्दुल मजीद साहब ने सन 1906 में  दिल्ली हाउस का जिम एक हर्बल दुकान की स्थापना की। और बाद में वही हर्बल दुकान हमदर्द के नाम से जाना जाने लगी। 


1920 में छोटी हर्बल दुकान एक विकसित उत्पादन घर बन गई। या यूं कहा जाए कि वही दुकान आगे चलकर हमदर्द कंपनी बन गई।

हमदर्द फाउंडेशन को 1964 में कंपनी के मुनाफे का भुगतान करने के लिए, समाज के हितों को बढ़ावा देने के लिए, बनाया गया था। कंपनी के सभी लाभ पर आधारित हमदर्द लैबोरेट्रीज गाजियाबाद में जुड़वा विनिर्माण संयंत्र और मानसर हरियाणा में एक संयंत्र लैबोरेट्री है। 

इसके उत्पादों में सबसे प्रसिद्ध उत्पाद शाफी है। जो खून साफ करने का काम और चेहरे पर दाग धब्बे साफ करने का काम करती है। हकीम अब्दुल माजिद साहब के दो बेटे थे। जिनमें बड़े बेटे का नाम हकीम अब्दुल हमीद था। और दूसरे बेटे का नाम हकीम अब्दुल सईद था।

भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद में हमदर्द कंपनी पाकिस्तान का निर्माण हुआ। और बड़े बेटे हकीम अब्दुल हमीद ने हमदर्द कंपनी भारत का निर्माण किया। हमदर्द कंपनियां दो भागों में विभाजित हो गई। भारत और पाकिस्तान हमदर्द कंपनियां अलग-अलग नहीं एक ही बाप दादा की औलाद है। अगर आप हमदर्द कंपनी का कोई भी product खरीदना चाहते हैं। हमदर्द कंपनी की वेबसाइट www.hamdard.in पर क्लिक करके खरीद सकते हैं। बहुत ही कम कीमत और मुनासिब दामों में ऑनलाइन आपके घर पर सामान उपलब्ध करा दिया जाएगा। मैं आशा करता हूं कि मेरे द्वारा दी गई जानकारी से आप संतुष्ट हैं।

हकीम अब्दुल मजीद: (1822- मार्च 1922) हाफिज अब्दुल मजीद भारत के पहली डेट में 1883 में पैदा हुए इनके पिता शेख रहीम बक्स थे कहा जाता है। कि वह पूरे पवित्र कुरान शरीफ को दिल से सीखा करते थे। और उन्होंने उर्दू और फारसी भाषाओं का ज्ञान बहुत अच्छा था। इसके बाद उन्होंने यूनानी ट्रेनिंग में उत्तम high level डिग्री हासिल की।

हकीम मोहम्मद अजमल खान।(1863- 1927ce) Hakeem Abdul majeeed की मुलाकात  बेहतर हकीम अजमल खान साहब से हुई। हकीम अजमल खान साहब को औषधीय पौधों को पहचानने में महारत हासिल थी। हकीम अजमल खान साहब और हकीम अब्दुल मजीद दोनों ने मिलकर औषधीय जड़ी बूटियों का बाग लगभग 50 एकड़ में  लगाया और उन्होंने 1906 में हमदर्द लैबोरेट्रीज की स्थापना की। बाद में हमदर्द लैबोरेट्रीज वक्त बोर्ड की कब्जे में हो गया।

हकीम अब्दुल हमीद 

हकीम अब्दुल हमीद हमदर्द कंपनी के संस्थापक हकीम अब्दुल मजीद साहब के बड़े साहब जादे थे।

सन 1922 में हकीम अब्दुल मजीद के इंतकाल के बाद उनके बड़े साहबजादे हकीम अब्दुल हमीद ने हमदर्द कंपनी का मात्र 14 वर्ष की आयु में कार्यभार संभाला। हकीम अब्दुल हमीद यूनानी और आयुर्वेदिक चिकित्सक जिन्होंने अपनी यूनानी और आयुर्वेदिक चिकित्सक की डिग्री बांग्लादेश यूनिवर्सिटी से हासिल की थी। हकीम अब्दुल हमीद ने अपने वालिद साहब के इंतकाल के बाद हमदर्द कंपनी को और बुलंदियों पर पहुंचा दिया। हमदर्द कंपनी के उत्पाद पूरे भारत में प्रसिद्ध है। हकीम अब्दुल हमीद के कार्य काल में हमदर्द कंपनी ने कुछ अचूक फार्मूले आजमा कर ऐसे उत्पाद का निर्माण करा जिसे आज भी लोग अपने प्रयोग में लाते हैं जैसे शाफी, सिंकारा, रूह अफजा आदि।


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