एम डी एच मसाले के मालिक कौन है। और  आजकल (2021) मैं कहां है, जानकर होंगे हैरान। 

आपने बचपन में एक नाम बहुत सुना होगा जी हां मैं बात कर रहा हूं एम डी एच मसाले की एम डी एच मसाले का नाम जब हम छोटे थे तब हर छोटे-बड़े की जुबां पर एमडीएच मसाले की चर्चा हुआ करती थी आप यह जानना नहीं चाहोगे एमडीएच मसाला जो इतना प्रसिद्ध मसाला हुआ करता था उस मसाले पर जो फोटो आता था दादा जी का वह दादा जी आजकल कहां है । आज हम एमडीएच पर आने वाले दादाजी के बारे में आपको विस्तार से बताएंगे।

हमारे बचपन में एम डी एच मसाले बहुत चर्चा में थे और उन पर दादा जी का जो फोटो आता था वह बहुत ही लोकप्रिय था। क्या आप यह जानना नहीं चाहेंगे एम डी एच मसाले पर जो दादाजी आते थे वह कौन थे। और वह उसका प्रचार क्यों करते थे, एवं एम डी एच मसाले से उनका क्या लिंग था। अगर यह आप सब जानना चाहते हैं तो इस लेख को आगे पढ़ते  रहें।


एमडीएच मसाले वाले दादा जी का जीवन परिचय:-

धर्मपाल गुलाटी जी का जन्म 27 मार्च सन 1923 दिन मंगलवार को सियालकोट उत्तर पूर्व भारत पाकिस्तान मैं महाशय चुन्नी लाल जी के यहां हुआ था इनकी माता का नाम चानन देवी था परिवार में यह तीन भाई और पांच बहन थी 8 भाई बहनों में धर्मपाल गुलाटी जी का पहला स्थान था। एमडीएच मसाले के दादाजी खत्री परिवार से ताल्लुक रखते थे। धर्मपाल गुलाटी जी ने एम डी एच मसाले तक का सफर बहुत ही संघर्ष करके हासिल किया। धर्मपाल गुलाटी जी एक आकर्षक शरीर के व्यक्ति थे इनके शरीर की लंबाई 5 फिट 7 इंच थी रंग गोरा था। धर्मपाल गुलाटी जी इन चीजों का बहुत शौक रखते थे धर्मपाल गुलाटी जी को पतंग उड़ाना कबूतर बाजी करना और पहलवानी करने का बहुत ज्यादा शौक था। 


धर्मपाल गुलाटी जी ने सन 1941 में पत्नी लीलावंती से शादी की और उनसे 2 पुत्र संजीव गुलाटी और राजीव गुलाटी ने जन्म लिया इनसे तीन पुत्रियां भी जिनका नाम अज्ञात है।

धर्मपाल गुलाटी जी को वर्ष 2016 में एबीसीआई वार्षिक पुरस्कारों में ईयर ऑफ द का पुरस्कार से सम्मानित किया गया वर्ष 2017 में लाइफ टाइम अचीवमेंट में उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 97 वर्ष की आयु में अचानक दिल का दौरा पड़ने से धर्मपाल गुलाटी जी की इलाज के दौरान माता चानन देवी हॉस्पिटल में 3 दिसंबर 2020 को मृत्यु हो गई। एमडीएच मसाले के जन्मदाता मसालों के किंग कहे जाने वाले महाशय जी, मसालों के राजा, और मसाला किंग दादाजी, अब हमारे बीच नहीं रहे।


दादाजी के बारे में कुछ रोचक बातें:-


  • एमडीएच मसाले पर दादाजी की जो फोटो आती थी वह फोटो एम डी एच मसाले के मालिक धर्मपाल गुलाटी की थी। धर्मपाल गुलाटी जी बचपन में अपने पिताजी के पास उनकी दुकान पर काम किया करते थे। पिताजी की दुकान का नाम महाशियां दी हट्टी था। धर्मपाल गुलाटी जी अपनी पढ़ाई के बाद अपने पिताजी के साथ अपनी खानदानी  मसाले की दुकान पर काम करते थे।


  • धर्मपाल जी जब छोटे थे, तब उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई थी। उन्होंने सिर्फ पांचवी पास  ही की थी। परिवार की आर्थिक स्थिति सही नहीं होने के कारण उन्होंने यह निर्णय लिया कि मैं कहीं और जाकर कुछ कार्य कर कर परिवार की स्थिति सुधारने की कोशिश करूंगा।


  • धर्मपाल गुलाटी जी  अपने फैसले पर अटल रहे और अपने पिताजी से मात्र 1500 रुपए लेकर दिल्ली आ गए। दिल्ली आकर वह अपनी भतीजी के यहां पर रहे। जहां उन्हें बिजली और पानी की आपूर्ति की कमी नजर आई।

  • पिताजी द्वारा दिए गए 15 सो रुपए मैं से रुपए 650 का उन्होंने घोड़ा तांगा लिया और कनॉट प्लेस से करोल बाग तक लोगों से २ आने को किराए के रूप में वसूलते रहे। धर्मपाल जी ने पर्याप्त जीवन यापन करने के लिए उनके द्वारा कमाई हुई राशि पर्याप्त नहीं हुई जिसके कारण उन्होंने अपने जीवन में कई अपमानजनक शब्द सुने।


  • इन सब के पश्चात धर्मपाल गुलाटी जी ने अपना घोड़ा तांगा बेच दिया। और अपना पुराना खानदानी काम मसालों का करना शुरू किया। एक छोटी सी दुकान किराए पर लेकर अपना मसालों का काम शुरू किया प्रारंभ में फायदा होने के बाद धर्मपाल गुलाटी जी ने सन 1953 में अपनी एक और दुकान चांदनी चौक मैं महाशियां दी हट्टी के नाम से स्थापित की।


  • उपरोक्त दोनों दुकानों के स्थापित होने के बाद धर्मपाल गुलाटी जी को अपने इस काम में मुनाफा होना शुरू हुआ कुछ वर्ष काम करने के पश्चात धर्मपाल गुलाटी जी ने सन 1959 में अपनी खुद की फैक्ट्री स्थापित करने के उद्देश्य से क्रांति नगर में जमीन खरीद ली। जहां उन्होंने एमडीएच मसाले के साम्राज्य को बहुत ऊंचे लेवल पर खड़ा कर दिया जो बाद में एमडीएच प्राइवेट लिमिटेड के नाम से स्थित हुआ। धर्म पाल गुलाटी जी ने एमडीएच मसाले का नाम अपने पिताजी की दुकान जो पहले महाशियां दी हट्टी नाम से हुआ करती थी। जिसको पंजाबी में महान अनुभव वाला व्यक्ति इसका अर्थ है।

  • धर्मपाल गुलाटी जी ने एम डी एच मसाले का देश नहीं बल्कि विदेशों में भी विस्तार किया। एम डी एच मसाले स्विट्जरलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, कनाडा, यूरोपीय देशों आदि में मसाले का निर्यात किया गया। जो आज हमारे भारत में नहीं बल्कि विदेशों में भी एमडीएच मसाले प्रसिद्ध हुए।

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