मुर्गी पहले आई या अंडा (अकबर और बीरबल की कहानी 2021.)

बात जब भी अकबर और बीरबल की किससे या कहानी की आती है, तो कोई भी व्यक्ति किस्से सुनने के लिए तैयार हो जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि अकबर और बीरबल के किस्से बहुत ही प्रचलित है।


 बीरबल को उनकी बुद्धिमता और चतुराई के लिए जाना जाता है। और बादशाह अकबर अपने समय के बहुत बड़े राजा गुजरे हैं बादशाह अकबर का बहुत बड़ा साम्राज्य था जिसका जिक्र किताबों या फिर हिस्ट्री ऑफ साइंस में भी किया गया है।


(1.)अकबर के महल में ज्ञानी पंडित का प्रवेश:-

एक समय की बात है, जब बादशाह अकबर अपने महल में सभा में बैठे थे। उसी समय एक ज्ञानी पंडित महल में आया और उसने अकबर बादशाह से कुछ सवाल जवाब करने की इजाजत मांगी। बादशाह ने उस ज्ञानीपंडित को इजाजत दे दी। ज्ञानी पंडित ने महल में उपस्थित सभी लोगों को चुनौती दी की महल में कोई ऐसा है, जो मेरे सवाल का जवाब दे सकता है।


लेकिन उस ज्ञानी पंडित के सवालों का जवाब देना अकबर बादशाह को भी मुश्किल हो गया। तब बादशाह अकबर ने बीरबल को बुलवाया और सवालों का जवाब देने के लिए बादशाह ने बीरबल को आगे कर दिया। बीरबल की चतुराई से सभी बाकी थे। महल में उपस्थित सब यह जानते थे कि बीरबल उस ज्ञानीपंडित के सभी सवालों का जवाब बहुत आसानी से दे सकता है।


 ज्ञानी पंडित ने बीरबल से कहा कि मैं तुम्हें दो विकल्प देता हूं। एक या तो तुम मेरे 100 आसान से सवालों का जवाब दो, और दूसरा या मेरे एक मुश्किल सवाल का जवाब दो। बीरबल ने इस पर कहा कि मैं आपके एक मुश्किल सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हूं। ज्ञानी पंडित ने बीरबल से सवाल किया कि यह बताओ दुनिया में मुर्गी पहले आई या अंडा। बीरबल ने तुरंत जवाब दिया कि मुर्गी पहले आई। इस पर  ज्ञानी पंडित ने कहां के इतनी आसानी से तुम यह कैसे कह सकते हो। 


बीरबल बोले यह आपका दूसरा सवाल है। ज्ञानी पंडित एकदम चुप हो गया और वहां से बिना कुछ कहे चुपचाप उठकर महल से चला गया। एक बार फिर बीरबल अपने चतुराई से बादशाह अकबर और महल की इज्जत बचाने में कामयाब हो गए।


कहानी से सीख:-

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि बुद्धिमता और चतुराई के साथ जवाब दिया जाए तो कठिन से कठिन सवाल का जवाब भी बहुत आसानी से दिया जा सकता है। कोई भी सवाल यह कार्य कठिन नहीं है बस हमें अपनी समझ बूझ से सोच समझकर उस कार्य को किया जाए तो बहुत आसानी के साथ हम यह कर सकते हैं।


(2.)धोखे बाज काजी (अकबर बीरबल की कहानी)। 2021.

एक बार की बात है जब बादशाह अकबर महल में कुछ अहम मुद्दों पर बात कर रहे थे। तभी वहां एक फरियादी फरियाद लेकर महल में आया और अकबर बादशाह के सामने गिड़गिड़ा ने लगा। बादशाह अकबर ने पूछा क्या बात है, बताओ इस पर फरियादी किसान बोला महाराज मैं एक गरीब किसान हूं। 


और मेरी पत्नी का निधन हो चुका है। मैं अकेला ही रहता हूं। मेरा मन किसी भी काम में नहीं लगता और मैं बुझा-बुझा का रहता हूं 1 दिन में काजी साहब के पास गया और मैंने उन्हें अपनी सारी बात बताई। काजी साहब ने मुझे यहां से काफी दूर एक दरगाह पर जाने के लिए कहा।

 उनकी बात से प्रभावित होकर मैं वहां जाने के लिए तैयार हो गया। लेकिन साथ ही मुझे अपने जिंदगी भर की पूंजी सोने के सिक्कों की चिंता होने लगी। यह बात मैंने काजी साहब को बताई तब उन्होंने  कहा की चिंता करने की कोई बात नहीं है। आप अपनी पूंजी मेरे पास जमा कर दें।और मैं आपके वापस आने पर आपकी पूंजी आपको वापस दे दूंगा।


इस पर मैंने अपनी जिंदगी भर की कमाई पूंजी वह सोने के सिक्के एक थैली में डालकर काजी साहब को दे दिए। काजी साहब ने मुझे थैली पर मोहर लगाने के लिए कहा।


बादशाह अकबर बोले  "अच्छा तो फिर क्या हुआ"। महाराज वह थैली मैंने मोहर लगाकर उन्हें दे दी। और मैं दरगाह के दीदार करने के लिए सफर पर चला गया। और इसके बाद जब मैं वहां से वापस लौटा तो काजी साहब ने वह थैली मुझे वापस दे दी। 

और मैं वह थैली लेकर अपने घर जब वापस लौटा और जाकर मैंने वह थैली खोली तो उसमें सोने के सिक्के नहीं वल्कि पत्थर निकले। मैंने इस बारे में जाकर काजी साहब से पूछा तो वह गुस्से से मुझ पर चिल्लाए और कहा कि बेवकूफ तुम हम पर चोरी का इल्जाम लगाते हो। 

इतना कहकर उन्होंने अपने नौकरों को बुलाकर मुझे वहां से मारकर और पीठ कर भगा दिया।


किसान ने रोते हुए और गिड़गिड़ा ते हुए कहा महाराज मेरे पास पूंजी के नाम से सिर्फ वही सोने के सिक्के थे। मेरे साथ न्याय और इंसाफ करें महाराज।


किसान की बात सुनकर महाराज ने बीरबल से यह मामला सुलझाने के लिए कहा। बीरबल ने किसान के हाथों से थैली लेकर उसकी ओर देखा और महाराज से थोड़ा समय मांगा। बादशाह अकबर ने बीरबल को यह मामला सुलझाने के लिए 2 दिन का समय दिया।


बादशाह अकबर से 2 दिन का समय लेकर बीरबल अपने घर गए और अपने नौकर को एक फटा कुर्ता लेकर कहां की जाओ ''इस पर अच्छे से रफू" करवा लाओ। नौकर कुर्ता लेकर चला गया और कुछ समय बाद रफू करवा कर वापस ले आया।


 बीरबल कुर्ते को देखकर खुश हो गए। क्योंकि कुर्ता इतने अच्छे से रफू किया गया था कि मानो फटा ही ना हो। यह देख कर बीरबल ने नौकर से उस दर्जी को बुलाने के लिए कहां जिसने कुर्ता रफू किया था। नौकर कुछ ही देर में उस दर्जी को बुला कर ले आया। बीरबल ने उससे कुछ पूछा और उसे वापस भेज दिया।


अगले दिन बीरबल महल में पहुंचे और सैनिक को काजी व किसान दोनों को बुलाने का आदेश दिया। कुछ ही समय के बाद सैनिक का जी और किसान दोनों को ले आया। इसके बाद बीरबल ने सैनिक से दर्जी को बुलाने के लिए भी कहा। 


यह सुनते ही काजी के होश उड़ गए। और दर्जी के आते ही बीरबल ने उससे पूछा "क्या काजी ने तुम्हें कुछ सिलने के लिए दिया था?"इस पर दर्जी ने कहा जी हां कुछ समय पहले मैंने सिक्को वाली थैली इनको सी कर दी थी। 


इसके बाद जब बीरबल ने काजी साहब से जोर देकर पूछा। तो का जी ने डर के मारे सब सच सच बता दिया।


काजी ने कहा महाराज मैं इतने सारे सोने के सिक्के देखकर लालच में आ गया था। मुझे माफ कर दो। बादशाह अकबर ने काजी को आदेश दिया कि वह किसान के सोने के सिक्के वापस लौटाये और साथ ही साथ काजी को 1 वर्ष की कारावास की सजा सुनाई।


 इसके बाद एक बार फिर महल में बीरबल की बुद्धिमता और चतुराई की चर्चा होने लगी  सभी ने बीरबल की चतुराई की खूब प्रशंसा की।


कहानी से सीख:-इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें भविष्य में कभी भी लालच नहीं करना चाहिए और ना ही किसी के साथ धोखा करना चाहिए। अगर हम किसी के साथ गलत काम करके कुछ पा लेते हैं उससे ज्यादा हमें देना पड़ता और गलत काम की सजा भुगतनी पड़ती है।

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