नवजात से 2 साल तक के बच्चे को कपड़े पहनाए लेयरिगं में।

सर्दियों का मौसम आ गया है। सर्दी बच्चों और बूढ़ों को एकदम प्रभावित करती है। इसलिए सर्दी की यह शुरुआत होती है तो बच्चों और बड़ों को सर्दी से बचने के लिए ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है। क्योंकि युवा व्यक्ति को सर्दी इतनी जल्दी प्रभावित नहीं करती जितनी कि बच्चों और बूढ़ों पर सर्दी प्रभावित होती है।


गुलाबी सर्दियां यूं तो सभी को पसंद आती हैं, पर कड़ाके की ठंड से बचाव भी बहुत जरूरी है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों का। ठंड के दिनों में नन्हें-मुन्नों और बड़े-बूढ़ों की कैसे करें हिफाजत, एक्सपर्ट्स से बात करके बता रहे हैं।


हिंदी गुरु


  •  डॉक्टर जूही मुखर्जी सीनियर कंसलटेंट फिजिशियन अपोलो हॉस्पिटल न्यू दिल्ली।

  • डॉक्टर विवेक रावत एमबीबीएस मेडिसिन फिजीशियन, नेहरू हॉस्पिटल कोलकाता।

  • डॉक्टर रानी चटर्जी चाइल्ड स्पेशलिस्ट , सुशीला तिवारी हॉस्पिटल,हल्द्वानी, उत्तराखंड।


छोटे बच्चों को बड़ों के मुकाबले हमेशा एक कपड़ा ज्यादा पहनाएं, मसलन अगर आप दो कपड़े पहन रहे हैं तो बच्चों को 3 कपड़ों की जरूरत होगी।


- छोटे बच्चों को कपड़े हमेशा लेयरिंग में पहनाएं। एक-दो मोटे कपड़े के बजाय 3-4 पतले कपड़े उनके शरीर को ज्यादा गर्म रखेंगे।

- हमेशा अंदर कॉटन के इनरवेयर पहनाएं। उसके ऊपर वॉर्मर, फिर शर्ट/टी-शर्ट/फ्रॉक आदि पहनाएं। उसके ऊपर स्वेटर/जर्सी पहनाएं।

- ज्यादा ठंड हो तो टोपी/मफलर और ऊपर से हुड वाला जैकेट भी पहनाएं।

- वॉर्मर पहनाने के बाद ही पाजामा पहनाएं। ठंड कम हो तो पाजामे के नीचे वॉर्मर की जरूरत नहीं होती।

- कुल्टिड (रजाई की तरह सिल कर बनाए हुए) कपड़े बच्चों को ज्यादा गर्मी देते हैं। ऐसे कपड़े पहनाना चाहिए।

- सर्दियों में कॉटन के बजाय ऊनी जुराबें पहनाएं। घुटनों के बल चलनेवाले बच्चों को हाथों में मिटन्स या दस्ताने भी पहनाएं। दस्ताने के मुकाबले मिटन्स पहनाना बेहतर है क्योंकि इनमें उंगलियों को आपस में गर्मी मिलती है।


हीटर का कमरे में इस्तेमाल।


- हो सके तो बच्चे के आसपास हीटर इस्तेमाल न करें। करना ही है तो ऑयल वाले हीटर यूज करें। ये कमरे से ह्यूमिडीटी खत्म नहीं करते। इन्हें भी लगातार न चलाएं। घंटा, दो घंटा चलाकर बंद कर दें। इसी तरह बाहर जाने से करीब 15 मिनट पहले हीटर बंद कर दें, वरना कमरे के अंदर और बाहर के तापमान का फर्क बच्चे को नुकसान पहुंचा सकता है।


- नवजातों (एक महीने तक) को दो-तीन दिन छोड़कर नहलाना चाहिए। इतने छोटे बच्चों की रोजाना गुनगुने पानी में टॉवल भिगोकर स्पॉन्जिंग करनी चाहिए।

- इससे बड़े बच्चों को रोजाना नहलाना चाहिए। अगर सर्दी-जुकाम है तो एक दिन छोड़कर भी नहला सकते हैं। रोजाना नहलाने से बच्चे कीटाणुओं से दूर रहते हैं।

- बच्चों को बंद जगह पर नहलाना चाहिए। वहां हवा नहीं आनी चाहिए। अगर धूप में नहलाना चाहते हैं तो धूप शीशे से छनकर आनी चाहिए। खिड़की-दरवाजा खोलकर नहलाएंगे तो हवा लग सकती है।

- बच्चे की रोजाना 10-15 मिनट मालिश जरूर करें। इससे बच्चे के मसल्स और जोड़ मजबूत होते हैं। मालिश बादाम, जैतून या बच्चों के तेल, किसी से भी कर सकते हैं। तेल का असली काम लुब्रिकेशन का है।

मालिश और नहाने के बीच 15 मिनट का गैप जरूरी है। मालिश के बाद बच्चे को दोबारा पहने हुए कपड़े ही पहना दें। खुले बदन रहने से ठंड लगने की आशंका होती है। - बच्चे को बिल्कुल हल्के गुनगुने पानी से नहलाएं। इस सीजन में उसे टब में बिठाकर न छोड़ें। हल्का साबुन लगाकर फटाफट शॉवर दें और निकाल लें। उसके कपड़े-लोशन आदि सब पहले से ही तैयार रखें और तुरंत पोंछ कर पहना दें।

- मालिश और खाने के बीच भी करीब घंटे भर का गैप जरूरी है। खाना खाने के तुरंत बाद मालिश करेंगे तो बच्चे को उलटी की आशंका होती है। साथ ही, खून का दौरा भी पेट से हाथ-पैरों की तरफ चला जाता है और खाना सही से नहीं पचता। हालांकि नहलाने के तुरंत बाद दूध पिला सकते हैं और खाना भी खिला सकते हैं।

बच्चों को धूप दिखाना जरूरी।

  •  बच्चे को धूप के जरिए विटामिन डी की खुराक दिलाना चाहते हैं तो सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच कभी भी 20-25 मिनट के लिए उसे धूप में खेलने दें। विटामिन डी के मकसद से बच्चे को कपड़ों में पूरा ढककर पार्क में ले जाएंगे तो कोई फायदा नहीं है।

  •  बच्चे के शरीर का कुछ हिस्सा (हाथ और पैर) खुला होना जरूरी है। बेहतर है कि शीशे से धूप अगर कमरे में आती हो तो बच्चे को वहां रखें क्योंकि खुले में रखने से हवा लग सकती है। बच्चे का बिस्तर गर्म रखें। 

  • उसके सोने से पहले हॉट वॉटर बॉटल रखकर बिस्तर को गर्म कर लें। बच्चे के सोने से पहले बॉटल वहां से हटा दें।


  • बच्चे के बिस्तर पर पतली रजाई बिछाएं। इससे उसे गर्मी मिलेगी। बिस्तर गर्म रहेगा तो बच्चा अच्छी तरह सोएगा।


 6 महीने तक के बच्चे को सिर्फ राई वाला तकिया लगाएं। यह उसके सिर पर दबाव नहीं डालता और सिर की शेप भी ठीक रखता है। इस उम्र के बाद चाहें तो कोई भी पतला-सा (4-5 इंच मोटा) तकिया लगा सकते हैं, लेकिन तकिया सॉफ्ट होना चाहिए।

कोशिश करें कि बच्चा अगर 9-10 महीने का है। तो उसे रात में फीडिंग की आदत न डालें। इससे उसके दांत खराब होने की आशंका होगी। आखिरी फीड 10:30से11 बजे के आसपास देना ठीक है।

नवजातों को रात में 11 से-11:30 के आसपास आखिरी फीड दें। और उसके बाद रात में 2-3 बजे और फिर सुबह 5-6 बजे। छह महीने के बाद रात में एक ही बार और करीब साल भर का होने पर 11 बजे के बाद बच्चे को दूध आदि न दें।


नोट: रात में सोते हुए रजाई/कंबल नहीं ओढ़ेगा, यह सोचकर कई लोग बच्चे को काफी ज्यादा कपड़े पहना देते हैं। यह सही नहीं है। इससे बच्चे को बेचैनी और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।


मौसमी फल और सब्जी बच्चों को जरूर खिलाएं।


  •  एक साल तक के बच्चों को मां के दूध के अलावा जरूरत पड़ने पर फॉर्मूला मिल्क (नैन, लैक्टोजन आदि) दें। इसके बाद दो साल के बच्चों को फुल क्रीम दूध दें। यह उम्र बच्चे के दिमाग और आंखों के विकास के लिहाज के काफी अहम होती है।


  • बच्चों को सीजनल सब्जियां दें। उन्हें सारे फल भी खिला सकते हैं। यह गलत है कि बच्चों को ठंड में संतरा आदि नहीं देना चाहिए। बच्चों के लिए विटामिन-सी बहुत जरूरी है। ताजा दही भी दे सकते हैं। दही फ्रिज में रखा नहीं होना चाहिए। हालांकि आयुर्वेदिक एक्सपर्ट मानते हैं कि दही, चावल, केला आदि बच्चों को नहीं देना चाहिए क्योंकि इनकी तासीर ठंडी होती है।


  •  7-8 महीने के बच्चे को रोजाना आधा बादाम और आधा काजू पीसकर दे सकते हैं। बच्चों को कभी भी साबुत न दें। वह बच्चे के गले में फंस सकता है। धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाएं। ध्यान दें कि बच्चे को ड्राई-फ्रूट्स से एलर्जी तो नहीं है। ऐसा है तो उसे ड्राई-फ्रूट्स न दें।


  •  रोजाना एक खजूर, 3-4 किशमिश खिला सकते हैं। और थोड़ा-सा केसर या शहद की 4-5 बूंदे भी चटा सकते हैं।


  • हफ्ते में दो बार उबालकर या ऑमलेट बनाकर एक अंडे का पीला हिस्सा भी खिला सकते हैं।


बच्चों को सर्दी-जुकाम हो जाए तो क्या करें।

  • बच्चों को अगर सर्दी जुखाम हो जाए तो जरूरी है कि बच्चों को स्टीम भाप जरूर दी जाए। ऐसा करने से बच्चों को जुकाम से बहुत बड़ी राहत मिलती है।

  •  5 मिनट के लिए दिन में 2-3 बार दें। जरूरत पड़ने पर कारवोल डिकॉन्गिस्टेंट कैप्सूल (Karvol Decongestant Capsules) भी डाल सकते हैं। यह ब्रैंड नेम कारवोल (Karovol) से मार्केट में मिलता है।


  • स्टीम देने के लिए स्टीमर का इस्तेमाल करें। बच्चे को अपनी गोद में बिठाकर स्टीम देना बेहतर है। अगर बच्चा सो रहा है तो उसके पास में स्टीमर रख सकते हैं। बच्चे को अकेला न छोड़े, वरना उसके जलने का खतरा होगा।


  •  बाथरूम बंद करके उसमें बच्चे को गोद में लेकर भी बैठ सकते हैं। पानी का टैप खुला रखने से बाथरूम में स्टीम भर जाएगी और बच्चे को उसका फायदा होगा। लेकिन बच्चे को टैप से दूर रखें, वरना गर्म पानी के छींटे उसे जला सकते हैं।

  • जरूरत पड़ने पर एस्पीरेटर (बच्चे की नाम साफ करने का यंत्र) इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन उसे हर इस्तेमाल के बाद अच्छी तरह साफ कर उबाल लें, वरना इन्फेक्शन हो सकता है।

  • सर्दी-जुकाम होने पर बच्चे को पानी और तरल चीजें देना जारी रखें, लेकिन ये थोड़े गुनगुने होने चाहिए, फिर चाहे दूध हो या पानी। सर्दियों में लोग बच्चों को पानी कम देते हैं, जोकि सही नहीं है। बच्चे की तबीयत ठीक है तो सादा वरना हल्का गुनगुना पानी थोड़ी-थोड़ी देर में दें। 


  •  बच्चे को अच्छी तरह ढककर रखें। शाम या रात के वक्त बाहर न निकालें। निकलना ही हो तो सिर से पैर तक पूरी तरह कवर करके निकालें। 



नोट : सर्दियों में बच्चे को जुकाम हो तो दो दिन तक ठीक होने का इंतजार कर सकते हैं। दिन में 2-3 बार स्टीम दें। और हल्का गुनगुना पानी दें। लेकिन साथ में खांसी भी हो तो डॉक्टर को दिखाना बहुत जरूरी हो जाता है।



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