दिवाली में अगर आपको तोहफे में मिला सोना, तो लगेगा टैक्स।2021.

नई दिल्ली-अगर आपको दिवाली पर तोहफे के रुप में सोना मिला है। और आप उसे बेचकर मुनाफा कमाते हैं। तो टैक्स का भुगतान आपको करना होगा। इन पर टैक्स सोने के उत्पादों के आधार पर लगता है। इसके लिए इन्हें दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है।पहली श्रेणी में सोने की ज्वेलरी, सिक्के और (ईटीएफ एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) को शामिल किया गया है। जबकि दूसरी श्रेणी में सॉवरेन गोल्ड बांड (एसजीबी) और गोल्ड डिपॉजिट सर्टिफिकेट (जीडीसी) आते हैं। आयकर विशेष को का कहना है कि आप सोने को बेचकर मुनाफा कमा लेते हैं। तो उस पर short term या long term capital gains के हिसाब से टैक्स लगेगा। यह सोना कितने दिन अपने पास रख कर बेचते हैं। उसी हिसाब से टैक्स भी देना होगा। गोल्ड ईटीएफ को 36 महीने नहीं हुए हैं। और आप उसे बेच रहे तो short term capital gains है।ं और इस पर स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है। गोल्ड ईटीएफ को अगर आप 36 महीने बाद बेच रहे हैं तो उस पर लोंग टर्म कैपिटल गैंस के हिसाब से टैक्स लगता है। इसकी बिक्री से होने वाले लाभ पर 20 फ़ीसदी टैक्स लगता है। Gold Mutule Fund पर 20 फ़ीसदी टैक्स और 4%सेस देना पड़ता है। यह नियम long term capital gains के लिए हैं। अगर गोल्ड म्यूच्यूअल फंड को 36 महीने के अंदर बेचते हैं, तो यह शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस में आएगा इसमें सीधे तौर पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। इसे अन्य स्रोत से कमाई मानकर स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा।


टैक्स क्या है?:-

टैक्स शब्द लैटिन शब्द “टैक्सो” से आया है। एक टैक्स एक अनिवार्य शुल्क या वित्तीय शुल्क है जो सरकार द्वारा किसी व्यक्ति या संस्था पर राजस्व जुटाने के लिए लगाया जाता है। जमा हुए टैक्स की कुल राशि को विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए उपयोग किया जाता है। कानून के मुताबिक, खुद से या गलती से टैक्स भुगतान ना करने पर जुर्माना या सज़ा सजा का प्रावधान है।चाहे आप दुनिया में कहीं भी रहते हों, पर आपको स्थानीय सरकार को टैक्स का भुगतान करना होता है । टैक्स कई प्रकार के होते हैं जैसे:-  state tax (राज्य कर), Centre government tax (केंद्र सरकार कर), Direct tax (प्रत्यक्ष कर), In direct tax (अप्रत्यक्ष कर) इत्यादि। मुख्यता भारत में टैक्स को दो श्रेणियों में विभाजित किया गया हैं – Direct tax और In direct tax यह इस बात पर निर्भर करता है कि सरकार को टैक्स का भुगतान कैसे किया जा रहा है। निम्नलिखित लेख में हम  उस टैक्स पर चर्चा करेंगे जिनका भुगतान एक भारतीय नागरिक द्वारा किया जाता है।


गोल्ड डिपॉजिट सर्टिफिकेट और बॉन्ड:-

क्या आप जानते हो गोल्ड डिपॉजिट सर्टिफिकेट जीडीसी आयकर कानून के तहत पूंजीगत संपत्ति नहीं है। इसलिए इस पर कोई टैक्स नहीं लगता है। वही सॉवरेन गोल्ड बांड एसजीबी मैं निवेश पर सरकार हर साल 2.50 फ़ीसदी निश्चित ब्याज देती है। जिसे करदाता की अन्य स्रोत से कमाई में जोड़ा जाता है। इसमें 8 साल की मैच्योरिटी अवधि के बाद होने वाले लाभ पर कोई टैक्स नहीं लगता है। लेकिन समय से पहले निकासी पर पॉइंट के रिटर्न पर अलग-अलग टैक्स की दर लागू है। आमतौर पर सॉवरेन गोल्ड बांड का lock in period 5 साल है। इसके या मैच्योरिटी अवधि पूरा होने से पहले गोल्ड बॉन्ड की बिक्री से मिलने वाला रिटर्न long term capital gains की श्रेणी में आता है। इसके तहत 20 फ़ीसदी टैक्स और 4 फीस दी  सेस प्लस सर चार्ज लगता है।



इनकम टैक्स स्लैब:


सभी व्यक्तियों पर समान टैक्स लागू नहीं होता है। नियम के अनुसार आपकी आय जितनी अधिक है। आपको उतनी अधिक राशि का भुगतान करना होगा। यह सुनिश्चित करता है, कि टैक्स की दरें और नियम एक समान होने के बजाय निष्पक्ष हों। सरकार आयकर स्लैब के उपयोग से टैक्स दर को निर्धारित करती है। जिस पर प्रत्येक व्यक्ति इनकम टैक्स का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है। 60 वर्ष से कम आयु के भारतीय निवासियों के लिए वर्ष 2020-2021 से टैक्स स्लैब दर निम्नलिखित है।


वित्त वर्ष 2020-21 से आगे के लिए आयकर स्लैब दर (नई व्यवस्था)

आयकर स्लैब।


60 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों और HUF लिए कर की दरें  NRI’S


2.5 लाख रुपये तक


शून्य


2.5 लाख से 5 लाख रुपये तक


5%


5 लाख रुपये से 7.5 लाख रुपये तक


10%


7.5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक


15%


10 लाख रुपये से 12.5 लाख रुपये तक


20%


12.5 लाख रुपये से 15 लाख रुपये तक


25%


15 लाख रुपये और ऊपर


30%


टैक्स भरने के लाभ:-

क्या आप जानते हैं की टैक्स भरने के क्या फायदे हैं। अगर आप टैक्स के फायदे नहीं जानते तो हम आपको इसी लेख में बताने वाले हैं कि टैक्स भरने के क्या फायदे या लाभ है। टैक्स वह राशि है जिस पर सरकार चलती है। और अपने नागरिक को सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करती है। टैक्स का भुगतान करने के लाभ निम्नलिखित हैं।


आपका टैक्स भुगतान सुनिश्चित करता है कि सभी नागरिकों के लिए सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाएं बिना किसी बाधा के चलती रहेंगी।

आप लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करने के लिए अपने इनकम टैक्स रिटर्न दस्तावेजों का उपयोग कर सकते हैं।

इस टैक्स की राशि से सरकार अपने नागरिक के लिए बेहतर सुविधाओं और उपयोगिताओं को प्रदान कर सकती है, जो बदले में लोगों के जीवन स्तर में सुधार करने में मदद करती है।

सरकार को बहुत सारे कार्य करने होते हैं। और जिसके लिए धन की आवश्यकता होती है। आपके धन का उपयोग सेनाओं, बुनियादी ढांचे के विकास, नागरिकों की सुरक्षा, प्रशासनिक सेवाओं आदि के लिए भी किया जाता है।



ज्वेलरी पर टैक्स नहीं:-


अगर आपको तो फिर के रूप में सोने की ज्वेलरी मिली है। तो उसे निवेश की श्रेणी में नहीं रखा जाता है। लेकिन सॉवरेन गोल्ड बांड या गोल्ड ईटीएफ के साथ यह छूट नहीं मिलती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि यह सभी उत्पाद निवेश की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में आपको टैक्स देनदारी का पूरा ध्यान रखना होगा गोल्ड में  long term capital के हिसाब से टैक्स चुकाना होगा। टैक्स कितना देना होगा यह इस बात पर निर्भर करेगा कि गोल्ड को कितने दिन बाद बेचा जा रहा है।


बलवंत जैन, टैक्स एवं निवेश सलाहकार के अनुसार,

तोहफा अगर ₹50000 से कम है तो टैक्स में छूट:-दिवाली पर तो फिर में मिले सोने की कीमत ₹50000 से कम है तो टैक्स नहीं लगेगा यह तो का परिवार या रिश्तेदार ने दिया है तो भी आपको टैक्स नहीं देना होगा टैक्स एवं निवेश सलाहकार एक्सपर्ट बलवंत जैन ने एक बातचीत में बताया।


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                                     हिंदी गुरु




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