महाराणा प्रताप की सच्ची कहानी

9 मई सन 1540 ईस्वी को जन्मे महाराणा प्रताप के बारे में शायद ही कोई ऐसा होगा जो नहीं जानता होगा। महाराणा प्रताप सिंह सिसोदिया, सिसोदिया राजपूत खानदान से थे। महाराणा प्रताप सिंह सिसोदिया का जन्म वर्तमान राजस्थान के कुंभलगढ़ में महाराजा उदय सिंह सिसोदिया एवं माता रानी जयवंताबाई के यहां हुआ था।
महाराणा प्रताप उदयपुर के मेवाड़ के राजा थे। उनका नाम इतिहास के सुनहरे पन्नों में वीरता,शौर्य,पराक्रम और दृढ़ के लिए अमर है। उन्होंने मुगल सम्राट बादशाह अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की और कई सालों तक संघर्ष किया। महाराणा प्रताप ने मुगलों को कई बार युद्ध में हराया भी।


1567 के हल्दीघाटी युद्ध में 500 भील लोगों को साथ में लेकर महाराणा प्रताप ने आमिर सरदार राजा मानसिंह के 80000 सैनिकों का सामना किया। हल्दीघाटी युद्ध में भील सरदार राणा पूंजा जी का योगदान सराहनीय रहा। शत्रु सेना से घिर चुके महाराजा महाराणा प्रताप को झाला मान सिंह ने अपने प्राण देकर बचाया। और महाराणा प्रताप का युद्ध भूमि छोड़ने के लिए बोला। शक्ति सिंह ने महाराणा प्रताप को अपना घोड़ा देकर बचाया। महाराणा प्रताप का सबसे प्रिय घोड़े चेतक की भी युद्ध भूमि में मृत्यु हुई। हल्दीघाटी का युद्ध और देवर एवं चप्पली की लड़ाई में महाराणा प्रताप को सबसे बड़ा राजपूत और उनकी बहादुरी के लिए जाना जाता था। मुगलों के सफल प्रतिरोध के बाद महाराणा प्रताप को मेवाड़ी राणा माना गया।

यह युद्ध केवल 1 दिन चला लेकिन इसमें 17000 से भी ज्यादा सैनिकों की मृत्यु हुई। मेवाड़ को जीतने के लिए मुगल सम्राट बादशाह अकबर ने बहुत प्रयास किया। मुगल सम्राट बादशाह अकबर से लड़ते-लड़ते महाराणा प्रताप की हालत बहुत ही चिंताजनक होती चली गई। 24000 सैनिकों को 12 साल तक का अनुदान देकर भामाशाह भी अमर हो गए।


महाराणा प्रताप कैसे मरे थे, जाने सच्चाई।
मुगल सम्राट बादशाह अकबर महाराणा प्रताप को कभी भी अपने अधीन नहीं कर पाया। जब महाराणा प्रताप की 57 वर्ष की आयु में 29 जनवरी सन 1597 को अपनी राजधानी चावंड में धनुष की डोर खींचते वक्त आंत फट जाने के कारण महाराणा प्रताप की मृत्यु हुई।
कहा जाता है कि मुगल बादशाह अकबर ने महाराणा प्रताप की मृत्यु पर बहुत अफसोस जताया था।

महाराणा प्रताप की तलवार कितने किलो की थी।

महाराणा प्रताप का भाला 81 किलो वजन का था। और उनकी छाती का कवच 72 किलो का था। उनके भाला कवच ढाल और दो तलवारों का वजन मिलाकर 208 किलो 208 था। महाराणा प्रताप बहुत ही बहादुर पराक्रमी थे। उनके भाला कवच और दो तलवारों का वजन से ही आप समझ सकते हैं कि वह कितने पराक्रमी थे। महाराणा प्रताप की वीरता इतिहास के पन्नो में आज भी दर्ज है। इस बात का इतिहास गवाह है, कि महाराणा प्रताप बहुत ही बहादुर थे। महाराणा प्रताप ने मुगल बादशाह अकबर से युद्ध में टक्कर ली थी।
वीर योद्धा महाराणा प्रताप




 





महाराणा प्रताप ने कितने वर्ष शासन किया।
महाराणा प्रताप ने 1576 से सन 1597 ईसवी तक शासन का कार्यभार संभाला। राजपूत सरदारों ने मिलकर विक्रम सावंत 1668 फागुन शुक्ल 15 अर्थात 1 मार्च 1576 महाराणा प्रताप को मेवाड़ की गद्दी पर बैठाया। इस घटना से जगमाल उनका शत्रु बन गया और मुगल बादशाह अकबर से जा मिला। महाराणा के मेवाड़ की राजधानी उदयपुर थी। इसलिए महाराणा प्रताप ने सन 1576 से सन 1597 ईसवी तक शासन किया।

महाराणा प्रताप ने कौन सा किला बनवाया।
उदयपुर राजस्थान का चित्तौड़गढ़ का किला बहुत ही ज्यादा प्रसिद्ध है। इस किले के बारे में आपने जरूर सुना होगा। अगर उदयपुर के चित्तौड़गढ़ के किले के बारे में आपने नहीं सुना है या आप यह नहीं जानते कि यह किला किसने बनवाया था। तो आपको हमारे इस लेख में पता चल जाएगा कि यह किला महाराणा प्रताप ने बनवाया था। पहाड़ी पर बना यह किला देश का सबसे बड़ा किला है और यह दुनिया भर में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है।


महाराणा प्रताप की कितनी पत्नियां थी। और कौन-कौन था उनके परिवार में।
महाराणा प्रताप की कितनी पत्नियां थी।



वीर योद्धा महाराणा प्रताप की 14 पत्नियां थी। महाराणा प्रताप की उन 14 पत्नियों के नाम निम्न बताए गए हैं।
अजबदे पंवार, अमोलक दे चौहान, चंपा कंवर झाला, फूल कमल राठौड़ प्रथम, रतन कंवर पवार, फूल कंवर राठौड़ दितीय, जसोदा चौहान, रतन कंवर राठौड़, भगवत कमल राठौड़, प्यार कमर सोलंकी, शाह मेहता हाड़ी, माधो कंवर राठौड़, आश कंवर खीचड़, रण कंवर राठौड़।
महाराणा के 14 पत्नियों से 16 पुत्र थे और 5 पुत्रियां थी। महाराणा प्रताप के 21 भाई थे। इतिहास में महाराणा प्रताप से बड़ा परिवार किसी का नहीं था। महाराणा प्रताप इतिहास के पन्नों में अपनी वीरता के लिए जाने जाते हैं। और इनका परिवार बहुत बड़ा परिवार था इतिहास के पन्नों में इनके परिवार का भी जिक्र है।

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