घर पर महफिले मिलाद कैसे कराएं।
महफिले मिलाद कैसे कराएं अपने घर पर



घर पर महफिले मिलाद कैसे कराएं, हजरत आज हम इसके बारे में ही बात करेंगे। क्योंकि हजरात बहुत से हमारे ऐसे मुस्लिम भाई हैं, जिनको महफिले मिलाद कराने के तौर तरीके की मालूमात नहीं है।

इसलिए आज मैं आपके लिए यह आर्टिकल लिख रहा हूं और मैं उम्मीद करता हूं कि मेरा यह आर्टिकल पढ़कर बहुत से मेरे मुसलमान भाइयों को इसकी नॉलेज हो जाएगी। की महफिले मिलाद का प्रोग्राम घर पर किस तरह कराया जाए। मेरे प्यारे भाइयों और मेरे नाज़नीनो और मेरे मोमिनो भाइयों आज आपके लिए मैं यह पोस्ट केवल इसी सिलसिले और वसीले से लिख रहा हूं। कि आपको सही मालूमात हो कि घर पर महफिले मिलाद कैसे कराया जाए।

सबसे पहले यह जानना बहुत जरूरी है कि महफिले मिलाद आखिर होता क्या है:-तुम मेरे प्यारे मुसलमान भाइयों अगर आप यह नहीं जानते हैं कि महफिले मिलाद क्या होता है तो आप मुसलमान है ही नहीं। क्योंकि हर मुसलमान इस बात को बहुत अच्छी तरह से जानता है,कि महफिले मिलाद क्या होता है। 


लेकिन मैं फिर भी अपने इस आर्टिकल में आपको बताने वाला हूं। क्योंकि जो मेरे भाई इस्लाम धर्म से ताल्लुक नहीं रखते हैं, वह भी इस बात को अच्छे से समझ जाएंगे कि आखिर में महफिले मिलाद क्या है। और इसको मेरे प्यारे मुसलमान भाई क्यों अपने घर पर इसका प्रोग्राम कराते हैं,तो चलिए आइए जानते हैं।

महफिले मिलाद क्या है?
महफिले मिलाद क्या है,आज आप इस लेख में यह बहुत अच्छी तरह से समझ जाएंगे कि आखिर मे महफिले मिलाद क्या होता है।
महफिले मिलाद या मिलादे अकबर मुस्लिम धर्म में अल्लाह के करीब पहुंचने का एक रास्ता है। या अपने गुनाहों को कम करने का एक रास्ता है।
मिलाद कराने वाले को अल्लाह की तरफ से जितना सवाब मिलता है उससे कई गुना ज्यादा सवाब महफिले मिलाद की महफिल में बैठकर मिलाद सुनने वाले को मिलता है।

मेरे प्यारे अजीज और भाइयों यह मैं नहीं कहता बल्कि मुस्लिम धर्म में ओलीया इकराम का कहना है की महफिले मिलाद का सुनना बहुत ही बड़ा सुन्नत है।
जब किसी मुसलमान भाई के यहां किसी का इंतकाल हो जाता है। तब तीजे की फातिहा जिस को स्वयं कहा जाता है, उसमें भी मिलादे-महफिल का प्रोग्राम किया जाता है। 

जब किसी हजरात के यहां इंतकाल होने के बाद 20 वां या 40 वां हो तो वह अपने घर पर अल्लाह का नाम और उसके वलियों का नाम लेने के लिए महफिले मिलाद का प्रोग्राम कराता है। 

महफिले मिलाद कराने से उसके घर में खैरो बरकत आती है। और कलाम ए पाक यानी कुरान की तिलावत हो जाती है। अब अगर आप मुसलमान है,तो समझ ही सकते हैं। कि जिस घर में कुरान पाक की तिलावत हो जाए। तो मेरे प्यारे हुजूर नबी करीम सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम का करम और मेरे आका रब्बुल आलमीन का जिक्र हो जाए।तो वहां कितनी खैरो बरकत होगी। यह आप समझ ही सकते हो। उम्मीद करता हूं दोस्तों आप बहुत अच्छे तरीके से समझ गए होंगे कि महफिले मिलाद क्या है।

महफिले मिलाद कैसे कराएं अपने घर पर।
महफिले मिलाद कैसे कराएं अपने घर पर, इस बारे में आज हम 1.आपको इस्लाम के दायरे में रहकर बहुत अच्छी तरह बताने वाले हैं। दोस्तों आप जब भी अपने घर पर महफिले मिलाद का प्रोग्राम कराएं। तो आपको कुछ बातों पर गौर करने की जरूरत है। अगर आप इस्लाम के दायरे में घर पर महफिले मिलाद करेंगे तो इंशाल्लाह आपके घर में रहमत के फरिश्ते और खैरो बरकत होती रहेगी।

2.जब आप घर पर महफिले मिलाद का प्रोग्राम करा रहे हो तब आप औलिया इकराम की चारपाई का रूख किबले की तरफ, यानी कि काबे की तरफ करें।

3.और महफिले मिलाद मे सुनने वाले हजरात को
 यह हिदायत दें की महफिले मिलाद में बैठकर बातचीत ना करें और उनके इत्र की खुशबू लगा दे। अगरबत्ती सो लगाएं जिससे कि अगरबत्ती की खुशबू महफिले मिलाद में पहुंच जाएं और मेरे आका का जिक्र है बहुत ही शान से होता रहे।

4.और महफिले मिलाद जब हो रहा हो तब वहां पर बैठे लोगों से यह कहा जाए कि महफिले मिलाद में बीच-बीच में प्यारे नबी हुजूर नबी ए करीम नबी सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम पर दुरूद भेजते रहो।

5. अगर आप इस तरीके से महफिले मिलाद कब प्रोग्राम अपने घर पर कराते हैं तो इंशाल्लाह बहुत ही ज्यादा करो बरकत होगी और अल्लाह का नाम और कलाम ए पाक की तिलावत महफिले मिलाद के साथ जरूर कराएं इंशाल्लाह बहुत ही ज्यादा करो बरकत आपके घर में हो गी।

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