मुंबई:-शोले फिल्म एक यादगार फिल्म है जिसको आज भी लोग देखते हैं। और वह फिल्म को देखकर तरोताजा हो जाते हैं। शोले फिल्म में असली मौत किसकी हुई थी। और इस फिल्म में डबल रोल किसका था।इसके बारे में आज हम आपको अपनी वेबसाइट के इस आर्टिकल के माध्यम से बताने वाले हैं। हमारी वेबसाइट पर बहुत रिसर्च करने के बाद एकदम सच्ची बात आर्टिकल का रूप में वेबसाइट पर पब्लिश की जाती है।

शोले फिल्म में असली मौत किस की हुई






बॉलीवुड के जाने-माने विलेन अमजद खान साहब ने अपने करियर में 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है। लेकिन शोले फिल्म उनकी एक यादगार फिल्म है और इसी फिल्म से उनको बॉलीवुड में असली पहचान मिली। फिल्म शोले से हटकर अमजद खान साहब ने अनेक फिल्मों में काम किया लेकिन उनके द्वारा निभाया गया फिल्म शोले में गब्बर का किरदार उनके और हमारे लिए यादगार रहा। अमजद खान साहब को फिल्म शोले के गब्बर के किरदार से असली पहचान मिली जिससे आज भी लोग उनको गब्बर के नाम से जानते हैं।

फिल्म शोले (sholay) का वो किरदार जिसने पूरे देश में खलबली मचा दी, जिसके बारे में मां अपने बच्चों से कहती थी, सो जा बेटा वरना गब्बर आ जाएगा। गब्बर सिंह का किरदार निभाकर अमजद खान (Amjad Khan) लोगों के दिलों दिमाग में हमेशा के लिए छा गए।  

अपने ठेठ अंदाज में बीहड़ का डकैत बनकर अभिनेता ने जो वाहवाही लूटी वो किस्मत वालों को ही नसीब होती है। लेकिन आप जब ये जानेंगे कि अमजद खान को गब्बर सिंह जैसी डायलॉग डिलीवरी करने की प्रेरणा किससे मिली तो आप हैरान रह जाएंगे। यह जानने के लिए आप हमारे इस आर्टिकल पर बने रहिए।

अपने अंदाज में किरदार निभाने की छूट दी अमजद खान को:-   याद कीजिए फिल्म शोले का वो सीन जिसमें हथेली पर तंबाकू मलते हुए गब्बर सिंह बोलता था अरे ओ सांभा, तेरा क्या होगा कालिया, कितने आदमी थे, तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठता था।  लेकिन डायलॉग डिलीवरी का ये अंदाज अमजद खान को ना तो फिल्म के डायरेक्टर ने बताया था और ना ही स्क्रिप्ट राइटर ने। बल्कि उन्होंने तो अमजद खान को अपने मौलिक अंदाज में गब्बर सिंह का किरदार निभाने की पूरी छूट दे रखी थी।


अमजद खान ने 'शोले' में एक धोबी का स्टाइल अपनाया।

फिल्म शोले में बोले अमजद खान ने धोबी के स्टाइल में डायलॉग


अमजद खान साहब ने फिल्म शोले में गब्बर सिंह वाला स्टाइल कहां से सीखा था। बहुत जल्द ही आप यह जान जाएंगे कि अमजद खान साहब ने शोले में निभाया गया उनका किरदार गब्बर सिंह कहां से और किसे देखकर निभाया था।

तो सवाल है कि गब्बर सिंह ने ये ठेठ अंदाज कहां से सीखा। दरअसल, अमजद खान के गांव में एक धोबी था। जो रोज सुबह सुबह लोगों से इसी अंदाज में बात किया करता था। अमजद खान उस धोबी के स्टाइल से बहुत ज्यादा प्रभावित थे। 

और गौर से उसे सुना करते थे। जब उन्हें फिल्म शोले में गब्बर सिंह का रोल करने की बड़ी चुनौती मिली तो उन्हें एक आइडिया सूझा। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में चर्चित विलेन की शैली को कॉपी करने की बजाय धोबी वाले ठेठ अंदाज को आजमाने की ठान ली। 

और उन्होंने फिल्म शोले में उस धोबी का स्टाइल अपनाकर गब्बर सिंह का रोल निभाया। और उनका यह गब्बर सिंह का रोल कैसा रहा यह आप सभी जानते हैं।

जब शूटिंग के दौरान अमजद खान ने गब्बर सिंह के डायलॉग बोले तो उनके इस अंदाज पर पूरी यूनिट हैरान रह गई। फिल्म के डायरेक्टर रमेश सिप्पी भी उनकी तारीफ किए बिना नहीं रह सके। 

शॉट ओके हुआ और उसके बाद पूरी फिल्म में अमजद खान उसी धोबी के अंदाज में ही चुन-चुनकर डायलॉग बोलते रहे और दर्शकों की वाहवाही लूटते रहे। धोबी का स्टाइल अपनाकर नतीजा यह हुआ कि अमजद खान 90 के दशक में जाने-माने विलेन के रूप में उभर कर आए। 


तंबाकू रगड़ता डाकू गब्बर सिंह



अमजद खान के करियर की सुपर डुपर हिट फिल्म शोले साबित हुई। इस फिल्म ने अमजद खान को कैरियर की बुलंदियों पर बैठा दिया। स्थान के कैरियर में फिल्म शोले की जगह किसी भी फिल्म ने नहीं ली। फिल्म शोले 15 अगस्त सन 1975 को रिलीज हुई और सिनेमाघरों में सबसे ज्यादा चली। मुंबई के एक सिनेमाघर में फिल्म शोले लगातार 5 वर्ष तक लगी रही और चलती रही।

फिल्म शोले में असली मौत किसकी हुई।

फिल्म शोले में चींटी की हुई थी असली मौत



फिल्म में आपने देखा होगा बहुत सारी मौतें हुई लेकिन वह सब मौतें काल्पनिक थी। फिल्म में जैसे अमिताभ बच्चन की मौत हुई। एक बुजुर्ग चाचा थे, फिल्म में उनके बेटे की मौत हुई।


और बहुत सारी मौतें जैसे ठाकुर के परिवार में मौतें हुई। वह सब मौतें काल्पनिक थी, इन सब काल्पनिक मौतों को छोड़कर फिल्म में एक ऐसी मौत हुई जो हकीकत में हुई थी। जो सच्ची मोत थी। क्या आप जानते हैं, वह मौत किसकी थी।

अगर आप उस हकीकत की मौत के बारे में नहीं जानते तो हम आपको इसी लेख में बताने वाले हैं। कि फिल्म शोले में किस की मौत हुई थी, क्यों हुई थी, और फिल्म के किस सीन पर हुई थी।


फिल्म शोले में एक सीन था जहां बुजुर्ग चाचा का बेटा जा रहा था। और गब्बर सिंह के आदमी उसे पकड़कर डाकू गब्बर के पास ले गए थे। वहां गब्बर सिंह बुजुर्ग चाचा के बेटे को मारने के लिए अपने आदमियों के साथ गुफ्तगू (डायलॉगबाजी) कर रहा था। 

उस समय डाकू गब्बर सिंह के हाथ पर एक चींटा चड़ जाता है। और डाकू गब्बर सिंह उस चींटे को मार देता है। अब आप समझ ही गए होंगे कि फिल्म शोले में असली और हकीकत में मौत उस चीटें की हुई थी। जो लोग चींटी यह चींटे को नहीं जानते हैं।वह लोग तस्वीर देखकर समझ सकते हैं कि चींटा क्या होता है। और इसी चींटे की फिल्म शोले में गब्बर सिंह ने असली में मौत की थी।

शोले फिल्म में डबल रोल किसका था।

शोले फिल्म में मुख्य भूमिका में अमिताभ बच्चन (जय) और धर्मेंद्र (वीरू) नजर आए थे। फिल्म की कहानी इन्हीं दो अपराधियों पर केंद्रित थी।

फिल्म में जब धर्मेंद्र और अमिताभ कोई फैसला लेने से पहले सिक्का उछालकर किसी निर्णय पर पहुंचते थे। उनका यही अंदाज फिल्म में काफी लोकप्रिय रहा।

बात की जा रही है फिल्म में डबल रोल किसका था। जो इस फिल्म के दीवाने हैं या यूं कहूं कि शोले फिल्म का दीवाना ही इस बात पर गौर कर सकता है। की फिल्म में डबल रोल किसका था।चलिए फिर भी हम आपको बताते हैं अगर आप नहीं जानते हैं कि शोले फिल्म में ़ रोल किसका था तो हम एक बार आपको बता देते हैं कि शोले फिल्म में डबल रोल अमिताभ बच्चन द्वारा उछाले गए उस सिक्के का था। जिसको फिल्म में हमेशा कोई फैसला लेने से पहले जय उछाल कर उस पर निर्णय करता था। वह सिक्का दोनों पहलू से एक ही था। लेकिन फिल्म में यह बात धर्मेंद्र यानी कि वीरू को तब पता चलती है जब अमिताभ बच्चन यानी कि जय की मौत हो जाती है।


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