गौस पाक की दरगाह कहां है। गौस पाक कौन थे। इनका पूरा नाम क्या था।आज हम आपको बताने वाले हैं।कि आखिर गौस पाक कौन थे। और इन को कितने नामों से जाना जाता था। आपको पीराने पीर दस्तगीर भी कहा जाता है। इन सभी सवालों का जवाब आपको हमारे इसी आर्टिकल में मिलने वाला है। जानने के लिए आर्टिकल को पूरा स्क्रोल कर के नीचे तक पढ़ें।

गौस पाक की दरगाह कहां है।

गौस पाक की दरगाह कहां है।


हजरत गौसे पाक की दरगाह बगदाद शरीफ में है। हजरत गोसे पाक का जन्म स्थल गीलान  तबरेस्तान पर्शिया जो वर्तमान में ईरान में है।

8 रबी उल अव्वल 561 हिजरी यानी कि 12 जनवरी सन 11 66 ईसवी मैं हजरत गोसे पाक का इंतकाल हुआ। अब्दुल कादिर जिलानी के इंतकाल के बाद उनके शव को बगदाद शरीफ में दफनाया गया। गौसे आजम यानी कि गोसे पाक की दरगाह बगदाद शरीफ में है।

अब्दुल कादिर जिलानी मोइनुद्दीन (गौस पाक)।

आपको अल्लाह ने वलियों का का सरदार बनाया। सैयद अब्दुल कादिर जिलानी आपका पूरा नाम है। आप के वालिद का नाम सैयद अबू सालेह मूसा है। और आपकी वालिदा का नाम सैयदा फातिमा है। अब्दुल कादिर जिलानी का जन्म 470 हिजरी में हुआ था। आपका जन्म गिलान राज्य के प्रांत में हुआ था जो इस वक्त वर्तमान में ईरान में है।

सैयद अब्दुल कादिर जिलानी मोइनुद्दीन को बहुत से नामों से जाना जाता है।कोई इन्हें गोसे पाक कहता है। और कोई इन्हें अब्दुल कादिर जिलानी कहता है। और कोई इन्हें हजरत पीराने पीर दस्तगीर कहता है। आपको गोसे आजम के नाम से भी जाना जाता है।

दुनिया में अल्लाह ने आप से बड़ा मर्तबा किसी और बलि को नहीं दिया आपको वलियों का सरदार बनाया है।

ऐसा माना जाता है कि आपकी वालिदा ने आपको 60 साल की उम्र में जन्म दिया। जो एक औरत के लिए बच्चे को जन्म देने की उम्र नहीं होती है। लेकिन अल्लाह की कुदरत तो देखिए आपकी वालिदा ने आपको 60 वर्ष की उम्र में जन्म दिया।

जब आप पैदा हुए थे तब रमजान का पहला दिन था। आपने अपनी वालिदा का दूध उस वक्त पिया जब लोग शहरी खा रहे थे। उसके बाद आपने सारा दिन अपनी वालिदा का दूध नहीं पिया। आपकी वालिदा आपको सारा दिन अपने दूध पिलाने की कोशिश करती रहीं लेकिन आपकी हलक से एक बूंद भी दूध नहीं उतरा।

जब इफ्तारी का वक्त हुआ तब आपने अपनी वालिदा का दूध पिया। यानी कि आपने पैदा होते ही एक रोजदारर की तरह ही रोजा रखा।

एक रिवायत में आया है कि हजरत सैयद अब्दुल कादिर जिलानी का जब जन्म हुआ। तब देखा गया कि आपके सीने  मुबारक पर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम के पैरों के निशान थे।

इसके साथ साथ ऐसा भी माना जाता है कि जब आपका जन्म हुआ उस समय 1100 बच्चों का और भी जन्म हुआ था। आपके जन्म के समय पैदा हुए अन्य बच्चे भी वर्ली और अल्लाह के करीबियों में से थे।

अब्दुल कादिर जिलानी (गौस पाक)और लुटेरों का वाकिया।

अब्दुल कादिर जिलानी और लुटेरों का वाकिया जो हम आपको बताने जा रहे हैं। यह बिल्कुल सच है, और इसका जिक्र कुरान में भी किया गया है।

यह वाकया उस समय का है जब अब्दुल कादिर जिलानी यानी कि गोसे पाक 18 वर्ष के हुए। तब आपकी वालिदा ने आपको और इल्म हासिल करने के लिए जिलानी को बगदाद भेजा काफिले के साथ। और आपकी वालिदा ने आपके साथ 40 दिनारे आपकी सरई के नाडे में बांधी। और अब्दुल कादिर जिलानी से यह कहा कि बेटा कभी झूठ नहीं बोलना।

अब्दुल कादिर जिलानी या गौसे पाक का काफिला पहाड़ी इलाके के पास से गुजर रहा था की उसी वक्त आप के काफिले पर लुटेरों ने हमला कर दिया। और आप के काफिले मैं लूटपाट शुरू कर दी। जब सब लोगों से लुटेरे ने कुछ ना कुछ लूट लिया और जाने लगे तब एक लुटेरे ने आपसे पूछा कि तेरे पास क्या है। अब्दुल कादरी जिलानी ने फरमाया कि मेरे पास 40 दिन आ रहे हैं। लुटेरों ने हजरत पीराने पीर दस्तगीर यानी कि गोसे आजम की बात को मजाक समझा और वह लुटेरे काफिले से लूटपाट करके अपने सरदार के पास चले गए। और अब्दुल कादिर जिलानी जो उस वक्त बच्चे थे उनका सारा वाकिया लुटेरों ने जाकर अपने सरदार को सुनाया। चोरों के सरदार ने यह सब सुनकर उस बच्चे जिलानी यानी के गौस आजम को सरदार ने अपना आदमी भैज कर बुलाया। सरदार ने अब्दुल कादिर जिलानी जो उस समय बहुत ही कम उम्र के थे पूछा कि बच्चे तुम झूठ भी बोल सकते थे और अपनी 40 दिन और बचा सकते थे। इस पर अब्दुल कादिर जिलानी ने कहा मेरी मां ने झूठ बोलने के लिए मना करा है। मेरे पास 40 दिनारे हैं।

लुटेरों ने बच्चे की सच्चाई देखकर बच्चे से लूटी हुई 40 दिनारें बच्चे को वापस कर दीं। और अब्दुल कादिर जिलानी के काफिले में जिससे जो लूटा गया  वह सब वापस कर दिया। बच्चे यानी कि अब्दुल कादिर जिलानी यानी गौसे आजम की सच्चाई देख कर लुटेरों का मन बदल गया और उन्होंने लूटा सामान वापस कर दिया।


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