मय्यत को नहलाने का सुन्नत तरीका। Mayyat ko gusal dene ka sunnat tarika in hindi.2022

0

अस्सलामु आलेकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातू हू मेरे प्यारे इस्लामी भाइयों आप सभी जानते हैं। कि जब इस्लाम धर्म में किसी का इंतकाल हो जाता है। तब इस्लाम धर्म में मय्यत को पाक साफी के साथ गुस्ल दिया जाता है। इस बात को मेरे हिंदू भाई नहीं जानते होंगे। इस्लाम में मय्यत को गुसल कैसे दिया जाता है यह जानने के लिए इस पोस्ट को नीचे तक स्क्रॉल करके पूरा पढ़ें।

मय्यत को गुस्ल देने का सुन्नत तरीका।

मय्यत को गुस्ल कैसे देते हैं, मय्यत को गुस्ल देने का सुन्नत तरीका


इस्लाम धर्म में जब किसी मर्द या औरत का इंतकाल होता है और वह शख्स दुनिया छोड़कर चला जाता है। तब उस मरने वाले के सगे संबंधी रिश्तेदार उसके कफन दफन के बारे में सोचने लगते हैं। लेकिन कुछ लोगों को इसके बारे में पता नहीं होता है। आज हम आपको मय्यत का गुस्ल देने का तरीका और उसके कफन दफन के बारे में बताएंगे।

Mayyat ko gusal dene ka sunnat tarika in hindi.

अब आप जानेंगे कि इस्लाम में मय्यत को गुस्ल देने का सही और सुन्नत तरीका कौन सा है।

  • सबसे पहले पानी गरम करने के लिए रख दें और उस पानी में बेरी के पत्ते डालकर गर्म करें।
  • पानी जब गर्म हो जाए तब उसमें अपने हाथ की उंगली डालकर पानी को चेक करें पानी इतना गर्म हो कि हाथ या शरीर ना जले।
  • अब घर के किसी कोने में लेक खोद लें। और उस पर एक तख्ता रख दें। अब तक के को साफ पानी से धो दें।
  • अब एक बर्तन में लोभान जलाकर या कोई अन्य खुशबू  की चीज लगा दें।
  • अब मय्यत को तख्ते पर लिटा दें। अगर किसी मजबूरी की वजह से तख्ता ना मिले तब मय्यत को चारपाई पर भी लिटा सकते हैं।
  • मय्यत के शरीर पर जो कपड़े हो वह उतार दें और मय्यत के शरीर पर नाभि से घुटने तक किसी अन्य कपड़े से ढक दें।
  • अब मय्यत को गुस्ल देने वाला शख्स अपने हाथ पर कपड़ा लपेटकर या दस्ताना पहनकर मिट्टी की साथ डेली या पानी से मय्यत को स्तनजा करायेगा।
  • अब मय्यत को गुस्ल देने वाला व्यक्ति अपने सीधे हाथ से मय्यत के पेट को धीरे धीरे दबाते हुये नीचे की तरफ लाएं। जो खुशबू हमने पहले लगाई थी वह लगातार सुलगती रहे।इस बात का ध्यान रखा जाए।
  • आखिर में चाहिए की मय्यत को नमाज जैसा बुजु कराया जाए। लेकिन इस बात का खास ध्यान रखा जाए कि मय्यत का बुजु कराते समय गट्टे तक हाथ धोना,तीन बार नाक में पानी चढ़ाना, तीन बार कुल्ला करना यह सब नहीं करना है बल्कि कपड़ा या रुई की फुरफुरी को पानी में भिगोकर दांतों मसूड़ों और होंठों व नाक में  फेर दें।
  • अगर मय्यत जनानी हो तो उसके सिर के बाल और मय्यत मर्दानी है, तो उसके सिर और दाढ़ी के बाल को अच्छी तरह पाक साबुन से धोंयें। अगर अच्छा पाक साबुन ना मिल पाए तो पानी से ही धों दें।
  • अब मय्यत को बांई करवट से लिटा कर वेरी का पानी इस तरह बहाए के पानी मय्यत के कानों तक पहुंच जाए।
  •  इसी तरह मय्यत को दांई करवट से लिटा कर सर से पांव तक पानी बहायें ताकि पानी मय्यत के टखनो तक पहुंच जाए।
  • और आखिर में कपूर का पानी सर से पांव तक बहा दे।
  • फिर कुछ कपड़ा लेकर आ इस्ता इस्ता से मय्यत के शरीर को पोंछ दें।
  • गुसल देने वाला पाक साफ और बुजुर्ग से है तो बहुत ही बेहतर है।
  • गुस्ल देते समय एक खास बात का ध्यान जरूर रखा जाए कि जब गु्स्ल दिया जा रहा हो तब मय्यत का पर्दा कर लिया जाए।ताकि मय्यत को बाहर का आदमी ना देखें।
  • मय्यत के चेहरे या परेशानी पर नमाज का निशान हो तो उस जगह कपूर मल दें। ऐसा करना बहुत ही जरूरी है, एक सुन्नत तरीका है।

अब मय्यत को गुस्ल देने का सुन्नत तरीका मुकम्मल हुआ।

 यह भी पढ़ें।


मय्यत को कफन किस तरह दें। मय्यत को कफन देने का सुन्नत तरीका।

मर्द की मैयत के कफन के कपड़े:-



(1) कमीज:-जिसको कफनी कहते हैं।


(2) इज़ार:-जिसको लूंगी या तहबंद कहते हैं।


(3) लिफाफा:-जिसको ऊपर से लपेटा जाता है।

औरत की मैयत के कफन के कपड़े:-

(1) कमीज:-जिसको कफनी कहते हैं।

(2)इज़ार:-जिसको लूंगी या तहबंद कहते हैं।


(3) लिफाफा:-जिसको ऊपर से लपेटा जाता है।

(4)ओढ़नी:-दुपट्टा

(5)सीना बंद:-सीने की जगह को ढकने वाला कपड़ा।

मय्यत के लिए कफन अच्छे कपड़े में होना चाहिए। मरने वाला जैसे ही ईद जुमे की नमाज पढ़ने के लिए कपड़े पहना करता था। उस तरह का कपड़ा मैयत के लिए होना चाहिए।अगर मय्यत जनानी है,तो उसका कपड़ा ऐसा होना चाहिए जैसे कपड़े पहनकर मय्यत अपने मायके जाती थी। उसी कीमत में कपड़ा होना चाहिए।

मेरे प्यारे इस्लामी भाई हमारे द्वारा दी गई जानकारी अगर आपको पसंद आई है। तो हमारे इस आर्टिकल को सोशल नेटवर्किंग साइट पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।  कमेंट करना ना भूलें।                धन्यवाद।


एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें (0)