2022 में ईद मिलादुन्नबी कब है। 2022 में 12 वफात कब है।

2022 में 12 वफात कब है



2022 में ईद मिलादुन्नबी कब है, आप यह जानेंगे हमारे इसी लेख के माध्यम से कि 2022 में 12 वफात कब है। ईद मिलादुन्नबी और 12 वफात यह एक ही त्यौहार है जिनको कई अलग-अलग नामों से जाना जाता है।

भारत सरकार(India goverment) ही नहीं बल्कि अन्य राज्य सरकारों के सरकारी अवकाश कैलेंडर में भी  मिलादुन्नबी की छुट्टी दर्शाई गई है। इसलिए आप यह न समझें कि यह त्यौहार सिर्फ भारत में ही मनाया जाता है। बल्कि यह त्योहार कई सारी मुस्लिम कंट्रीयों(countryon) में मनाया जाता है।

2022 में ईद मिलादुन्नबी कब है बिल्कुल सटीक जानकारी प्राप्त करने के लिए आर्टिकल को पूरा पढ़िए।
आप सभी जानते होंगे कि मुस्लिम तोहार हिजरी कैलेंडर के हिसाब से मनाए जाते हैं। और इसी वजह से मुस्लिम त्योहार को कोई एक्जेक्टली नहीं बता पाता है।

यह त्यौहार हिजरी कैलेंडर के हिसाब से मनाया जाते हैं और गुजरी कैलेंडर के हिसाब से ही इन त्योहारों की डेट आगे पीछे होती रहती है। 2021 में 12 वफात का त्यौहार 19 अक्टूबर को मनाया गया था। और अब 2022 में ईद मिलाद उल नबी का त्यौहार या 12 वफात का त्यौहार 9 अक्टूबर को मनाया जाएगा। 9 अक्टूबर की डेट एक उम्मीद है ना कि बिल्कुल एग्जिट आपको बताया गया है इसमें एक या 2 दिन आगे पीछे हो सकते हैं क्योंकि यह हिजरी कैलेंडर के हिसाब से ईद मिलादुन्नबी का त्यौहार मनाया जाता है।

ईद-मिलाद उल नबी या 12 वफात़ का त्यौहार क्यों मनाते हैं।
2022 में ईद मिलादुन्नबी कब है


ईद मिलाद उल नबी या 12 वफात के त्यौहार को मुस्लिम लोग क्यों मनाते हैं यह आप जानेंगे हमारे इस लेख के माध्यम से।
हम अपने आर्टिकल मैं बहुत ही सही और सटीक जानकारी को आपके सामने पब्लिश करते हैं।

ईद मिलादुन्नबी का त्योहार हजरत मोहम्मद उर रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम की याद में मनाया जाता है। हजरत मोहम्मद उर रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम मुसलमानों के नवी हैं जिन्होंने दुनिया में आकर अल्लाह की तरफ से नबूवत हासिल की और मुसलमानों को इस्लाम धर्म के बारे में समझाया। जो लोग उन पर ईमान लाए वह मुसलमान हो गए और जो उन पर ईमान नहीं लाए वह काफिर रहे।

इस्लाम धर्म में ऐसा माना गया है कि हजरत मोहम्मद उर रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम मुसलमानों के पहले और आखिरी नवी हैं। पहले से मतलब यह है कि अल्लाह ने उनको पैदा करने से पहले ही उनका नूर यानी कि उनकी रूह दुनिया में पैदा कर दी थी।

हदीस:-हजरत हजरत नबी करीम नबी सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम के सिलसिले में एक हदीस है जिसमें बयान है कि एक मर्तबा हजरत मोहम्मद साहब की बेटी फातिमा घर पर अकेली थी। अल्लाह की तरफ से हजरत जिब्राइल अलैहिस्सलाम जो वही लेकर आते थे।

अल्लाह का फरमान लेकर नबी के पास आते थे। हजरत मोहम्मद साहब घर पर नहीं थे। हजरत जिब्राइल अलैहिस्सलाम ने आवाज लगाई तब घर से बाहर हजरत बीबी फातिमा तशरीफ लायीं और आपने फरमाया अब्बू जान घर पर नहीं है।चाचा जी, चाचा जी का अल्फाज बीबी फातिमा के मुंह से सुनकर हजरत जिब्राइल अलैहिस्सलाम ने इरशाद फरमाया की बेटी हम आपके अब्बू जान से बड़े हैं। 


इसलिए आप हमें चाचा जी कहकर ना पुकारे। हजरत बीबी फातिमा ने फरमाया कि जी ठीक है। अब्बू जान जब घर पर आएंगे तब हम इस सिलसिले में उनसे बात करेंगे। हजरत नबी ए करीम नबी सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम जब घर तशरीफ़ लाएं। 


तब हजरत बीबी फातिमा ने अपने वालिद साहब से पूछा। के अब्बू जान हजरत जिब्राइल अलैहिस्सलाम घर पर तशरीफ लाए थे। और हमने उनसे चाचाजी कहा तब उन्होंने हमसे मना कर दिया। कहां बेटी हमें चाचा जी कहकर ना पुकारा करो हम आपके अब्बू जान से बड़े हैं। 
हजरत मोहम्मद साहब ने बेटी बीबी फातमा से फरमाया कि बेटी जब दोबारा हजरत जिब्राइल अलैहिस्सलाम तशरीफ लाएं। तब उनसे आप पूछना कि 70 बरस में आसमान में जो तारा चमकता है। वह उन्होंने कितनी बार देखा है। 

अगली बार जब हजरत जिब्राइल अलैहिस्सलाम दोबारा हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम के घर तश्रीफ लाये। तब हजरते बीबी फातिमा ने उनसे पूछा आप यह बताइए 70 बरस में जो एक मर्तबा तारा आसमान में चमकता है। वह आपने कितनी बार देखा है। 

हजरत जिब्राइल अलैहिस्सलाम ने इरशाद फरमाया की बेटी वह तारा मैंने एक ही बार देखा है। तब हजरत बीबी फातिमा ने फरमाया कि मैंने अब्बू जान से पूछा था,कि जो 70 बरस में तारा एक बार ही आपने देखा है,वह हमारे वालिद साहब का नूर है।

मेरे प्यारे भाइयों अब आप समझ ही गए होंगे हजरत मोहम्मद उर रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम का रुतबा कितना बड़ा है। मेरे प्यारे भाइयों यह मैं नहीं कहता हूं यह इस्लाम और इस्लाम की हदीसे कहती हैं। कि हजरत मोहम्मद उर रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम मुसलमानों के पहले और आखिरी नबी है। 

आप समझ गए होंगे कि पहले नबी का मर्तबा उन्हें क्यों हासिल है। और आखिरी नबी का मर्तबा इसलिए दिया गया है क्योंकि उनके बाद इस दुनिया में कोई दूसरा नबी ना होगा।

हजरत मोहम्मद उर रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम का जन्म 8 जून सन 570 ईसवी में मक्का में हुआ था जो सऊदी अरब में है। इनकी वालिदा का नाम आमीना था और उनके वालिद साहब का नाम अब्दुल्ला था।
हजरत मोहम्मद उर रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम का इंतकाल 8 जून सन 632 ईसवी को हुआ था। इनके जन्म और इंतकाल की तारीख अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब में 8 जून है। जो (Same)सेम है।


और हिजरी कैलेंडर के हिसाब से तीसरा महीना रबी उल अव्वल होता है उसके 12 तारीख भी (same)सेम है। इसलिए 12 रबी उल अव्वल महीने के 12 तारीख को ही 12 रबी उल अव्वल यानी ईद मिलाद उल नबी या 12 वफात का त्यौहार मनाया जाता है। 

इनका जन्म भी हिजरी कैलेंडर के अनुसार रबी उल अव्वल महा के 12 तारीख को हुआ था और इनका इंतकाल भी इसी तारीख को हुआ था इसलिए मेरे प्यारे मुसलमान भाई हजरत मोहम्मद उर रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम का जन्म और इंतकाल ईद मिलाद उल नबी या 12 वफात के रुप में मनाते हैं।

निष्कर्ष: मैं आशा करता हूं कि आप मेरे द्वारा दी गई जानकारी से सहमत होंगे क्योंकि मैंने जिस तरीके से आपको समझाया है। शायद ही कोई आपको गूगल पर इस तरह समझा पाएगा। 12 रबी उल अव्वल क्या है, ईद मिलाद उल नबी क्या है। और ईद मिलाद उल नबी का त्योहार 2022 में कब मनाया जाएगा या 12 वफात का त्योहार 2022 में कब मनाया जाएगा।

यह मैंने आपको अपने आर्टिकल 2022 में ईद मिलादुन्नबी कब है बहुत ही सरल अंदाज में आपको बताया है। हजरत मोहम्मद उर रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम मुसलमानों के कौन हैं।

 इनको पहले और आखिरी नबी का मर्तबा क्यों हासिल है। यह भी मैंने अपने इस पोस्ट में आपको बताया है। 12 वफात या ईद मिलाद उल नबी का त्यौहार हजरत मोहम्मद उर रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम के सिलसिले में मनाया जाता है।  

यह भी मैंने आपको अपने आर्टिकल में विस्तार से समझाया है। कि हजरत मोहम्मद उर रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम के वसीले और सिलसिले में इस त्यौहार को मनाया जाता है। उनकी याद में मनाया जाता है।

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