2023 में शबे बरात कब है, Shubraat kab hai 2023 me in hindi.

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शबे बरात का त्यौहार मुसलमानों के लिए बहुत ही ज्यादा खास मायने रखता है। क्योंकि शबे बारात के त्यौहार में मुसलमान भाई अल्लाह की इबादत करते हैं और अल्लाह से अपने गुनाहों की तौबा करते हैं। शबे बरात कब मनाई जाएगी 2023 में इसकी मुकम्मल डेट इसलिए नहीं बता सकते क्योंकि मुसलमानों में उनके त्यौहार हिजरी कैलेंडर के हिसाब से मनाए जाते हैं। हिजरी कैलेंडर से मतलब है, कि मुसलमानों के त्यौहार चांद की तारीख के हिसाब से मनाए जाते हैं।

शबे बरात 2023 में कब है


2023 में शबे बरात कब है, और मुसलमान शबे बरात क्यों मनाते हैं। आपके इन सभी सवालों का जवाब हमारे इस आर्टिकल में मिलने वाला है। 2023 में शबे बारात 8 मार्च को मनाई जा सकती है।

मुसलमान शब-ए- बरात क्यों मनाते हैं।

शबे बरात क्या है,इसके बारे में आपको हमारे इसी लेख में विस्तार से जानकारी मिलने वाली है। जानने के लिए हमारे आर्टिकल को आखिर तक पूरा पढ़ें और अपनी कन्फ्यूजन दूर करें।


भारत के मुसलमान भाई शबे बरात को क्यों मनाते हैं, इस विषय पर हम विस्तार से चर्चा करेंगे और आपके लिए एक सटीक जानकारी लेकर हाजिर हुए हैं।


भारत में शबे बारात का त्यौहार पहली बार 630 वी शताब्दी (हिजरी) को मनाया गया था।


मुस्लिम धर्म के संस्थापक हजरत मोहम्मद साहब जिन्हें इस्लाम धर्म में सल्लल्लाहो ताआला अलेही वसल्लम के नाम से जाना जाता है।


हजरत मोहम्मद उर रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम ने इस्लाम धर्म का प्रचार किया। उस वक्त में इन पर काफिरों ने जो इस्लाम धर्म से ताल्लुक नहीं रखते थे। 


बहुत ही ज्यादा जुल्म किये लेकिन उन्होंने उनके जुल्म के खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाई। और अपने इस्लाम धर्म का प्रचार प्रसार करते रहे। हजरत मोहम्मद उर रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम पर अगर किसी ने कूड़ा पत्थर आदि फेंका। 


तब भी हजरत मोहम्मद साहब ने उसे प्यार दिया उससे नफरत नहीं उनके इसी रवा ऐसे लोगों के दिलों में प्यार पैदा हुआ और इस्लाम धर्म के खिलाफ समर्थन में वही लोग आगे आए।


और हजरत मोहम्मद उर रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम पर ईमान लाए और मुसलमान हो गए।


हजरत मोहम्मद उर रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम को काफिरों ने मक्का से निकाल दिया और वह मदीने चले गए। 


कुछ दिनों तक वहां रहने के बाद हजरत मोहम्मद उर रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम 630 शताब्दी में वापस मक्का चले आए तब मक्का के रहने वाले बाशिंदों ने उनके वापस आने की खुशी में शबे बरात का त्यौहार मनाया। 


शबे बरात दो शब्दों से मिलकर बना एक शब्द है। शब का मतलब होता है, रात से और बारात का मतलब है बरी होने से।


शबे बरात का त्यौहर 2023 में कब है।

शबे बरात का त्यौहार 2023 में 8 मार्च, दिन बुधवार 2023 को होने की उम्मीद है। उम्मीद इसलिए कि पक्का नहीं कहा जा सकता कि यह शबे बरात का त्यौहार 2023 में 8 तारीख को होगा। क्योंकि मुसलमानों के त्यौहार चांद की तारीख के हिसाब से मनाया जाते हैं। और चांद की तारीख में महीना 30 या 29 का होता है, इसलिए चांद के हिसाब से ही मुसलमानों के त्योहार मनाए जाते हैं।


शबे बरात का त्यौहार एक रात का त्यौहार होता है। जिसे मुसलमान भाई बहुत ही उत्साह के साथ एक रात के त्योहार को मनाते हैं।


सारे मुसलमान भाई शबे बरात के त्यौहार को बहुत ही खुशी के साथ मनाते हैं। इस रात मुसलमान भाई मस्जिदों में अल्लाह की इबादत करते हैं। इबादत से मतलब यह है कि सारी रात नफिल नमाज अदा करते हैं। और प्यारी मुसलमान बहने अपने घर पर अल्लाह की इबादत में सारी रात नफिल नमाज अदा करती रहती और अल्लाह से दुआ करती है। और हमारे जो प्यारे मोमिन हैं वह कब्रिस्तान में जाकर अपने अपने प्यारे अजीजो की कब्रों पर अल्लाह से दुआ करते हैं और उनकी मगफिरत की दुआएं मांगते हैं।


मुसलमान धर्म में ऐसा भी माना गया है, कि इस रात अल्लाह के यहां से मृत्यु का हिसाब किताब इसी रात को लिख दिया जाता है।


मुसलमानों के लिए शबे बरात का त्यौहार बहुत ही बड़ा त्यौहार है। यह त्योहार एक रात का त्योहार होता है। और इसी त्योहार की रात को प्यारे मुसलमान भाई अल्लाह की इबादत में यह रात गुजारते हैं। और अपने गुनाहों की तौबा करते हैं। और अल्लाह से अपने अजीज जो के लिए दुआ करते हैं। जो दुनिया से रुखसत हो चुके हैं,उनकी कब्रों पर जाकर अल्लाह की बारगाह में हाथ उठाकर यह दुआ करते हैं, कि या अल्लाह उनकी मगफिरत अता फरमा। आमीन


उम्मीद करता हूं कि मेरे इस आर्टिकल के माध्यम से शबे बरात क्या होती है। यह आप बहुत ही अच्छे तरीके से समझ गए होंगे। और मैं मेरे प्यारे मुसलमान भाई इस त्यौहार को क्यों मनाते हैं यह भी आप जान ही गए होंगे अगर आपको मेरे द्वारा दी गई है जानकारी पसंद आई हो तो मेरे इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।







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