कुर्बानी करने की दुआ हिंदी में।


मेरे प्यारे इस्लामी भाइयों आज आप जानेंगे कि बकरा ईद के मौके पर बकरा क्यों काटा जाता है। बकरा ईद पर बकरे की कुर्बानी क्यों की जाती है। कुर्बानी की दुआ हिंदी में क्या है। कुर्बानी करने की दुआ हिंदी में। ऐसे तमाम मसलों की जानकारी आपको हमारे इस आर्टिकल में आज मिलने वाली है। जानने के लिए स्क्रॉल करके आर्टिकल को ऊपर से नीचे तक पूरा पढ़ें।

उम्मीद है शायद आप जानते ही होंगे और अगर नहीं जानते तो मैं आपकी जानकारी के लिए बताता हूं। बकरा ईद के मौके पर ही मुसलमान भाई हज को जाते हैं। मुसलमान भाइयों का इसी महीने यानी धू-अल-हिज्जा के आठवें दिन से हज शुरू होकर 13 वें दिन पूरा होता है।

2022 में बकरा ईद कब है।

ईद-उल-अजहा (Eid-Al-Adha 2022) यानी की बकरीद बकरा ईद (Bakra Eid) इस्लामिक कैलेंडर के 12वें महीने धू अल हिज्जा की दस तारीख को मनाई जाती है। इस साल यह त्यौहार 10 जुलाई को है। अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक, यह तारीख हर साल बदलती रहती है। चांद पर आधारित इस्लामिक कैलेंडर, अंग्रेजी कैलेंडर से 11 दिन कम छोटा है। बकरीद का नाम ईद-उल-अजहा अरबी देशों में प्रचलित है।

बकरा ईद 2022 में 10 और 11 जुलाई 2022 को संपूर्ण भारत में होने की संभावना है। संभावनाएं इसलिए क्योंकि बकरा ईद या सिबंई वाली छोटी ईद चांद की तारीख के हिसाब से होती है। लेकिन एक बात जरूर है, बकरा ईद की तारीख चांद देखने पर मुकर्रर हो जाती है। क्योंकि यह चांद की 10 तारीख को मनाई जाती है।

 इसलिए इसका पूरा पक्का पता हमें चांद की 1 तारीख को चलेगा। लेकिन हमने जो 10 और 11 जुलाई की तारीख बतायी है यह 99% सही होने की संभावना है। इसलिए मैं एक बार आपसे फिर कहूंगा कि हमारे द्वारा बताई गई तारीख को आप हल्के में ना लें।

भारत में इस त्यौहार को बकरा-ईद ही कहा जाता है। ज्यादातर मुसलमान इस दिन बकरे या कई जगह भैंस, ऊंट की कुर्बानी देते हैं।ईद-उल-जुहा’ के पीछे अल्लाह की राह में उस चीज़ की कुर्बानी देना है, जो आपको प्यारी हो। बकरीद अपना कर्तव्य निभाने और अल्लाह पर विश्वास रखने का पैगाम देती है।

बकरा ईद के मौके पर कुर्बानी के गोश्त का क्या होता है।

कुर्बानी का गोश्त तीन हिस्सो में बांटा जाता है। जिसका एक हिस्सा अपने लिए, दूसरा गरीबों और तीसरा पड़ोसियों/रिश्तेदारों-सगे संबंधियों के लिए होता है। 


इस त्योहार का पैगाम, दिल की करीबी चीज़ दूसरों की बेहतरी और अल्लाह की राह में कुर्बान करना है। कुर्बानी के लिए बकरा कम-से-कम दो-चार दांत यानी एक-डेढ़ साल का होना चाहिए।


ईद और बकरीद के त्योहार में बड़ा अंतर है। ईद का त्योहार जहां चांद दिखने के अगले ही दिन यानी उस महीने की एक तारीख को मनाया जाता है।जबकि बकरीद चांद दिखने के दस दिन बाद यानी उस महीने की दस तारीख को मनायी जाती है।

कुर्बानी करने की दुआ हिंदी में।

इन्नी वज्जहतु वजहि य लिल्लज़ी फ़ त रस्मावाति वल अर्दा हनीफँव व् मा अ न मिनल मुशरिकीन इन न सलाती व नुसुकी मह्या य व ममाती लिल्लाहि रब्बिल आलमीन * ला शरी क लहू व बि ज़ालि क उमिरतु व अ न मिनल मुस्लिमीन * अल्लाहुम्मा ल क व मिन क बिस्मिल्लाहि अल्लाहु अकबर *


कह कर ज़िबह करे , फिर यह दुआ पढ़े ।

अल्लाहुम्मा तकब्बल मिन्नी कमा तकब्बलता मिन ख़लीलिक इबराहीमा अलैहिस्सलामु व हबीबिक मुहम्मदिन सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम *


नोट- अगर क़ुर्बानी (Qurbani) अपनी तरफ से हो तो मिन्नी और अगर दूसरे की तरफ से जिबाह हो।तो मिन्नी कीं जगह मिन फला कहें । यानी उसका नाम ले।


मतलब अल्लाहुम्मा तकब्बल मिन ( यहाँ जिसकी तरफ से क़ुरबानी हो उसका नाम ले जैसे- मिन कबीर , मिन नईम वगैरह ) कमा तकब्बलता मिन ख़लीलिक इबराहीमा अलैहिस्सलामु व हबीबिक मुहम्मदिन सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ।


और अगर जानवर मुश्तरक ( शिरकत की कुर्बानी ) हो। मतलब कुछ लोग मिलकर क़ुर्बानी कर रहे हो तो – ऊंट, भैंस वगेरह, तो फला ( मिन ) की जगह सब शरीको के नाम लें।

नोट – कुर्बानी (Qurbani) का जानवर अगर खुद जिबाह ना कर सके तो किसी सुन्नी सहीहुल अकीदा ही से जिबाह कराएं। अगर किसी बद अकीदा और बेदीन वगैरह से क़ुर्बानी का जानवर जिबाह कराया तो कुर्बानी नही होगी ।


इसी तरह हरगिज़ किसी बद मजहब व बेदीन के साथ कुर्बानी में हिस्सा ना लें। वरना आपकी कुर्बानी भी नाजायज़ (बेकार) हो जाएगी। और गुनाह का बोझ सर पर आएगा। ख़याल रहे कि क़ुर्बानी का गोश्त वगैरह कुफ्फार व मुश्रिक़ीन को देना मना है।

मेरे प्यारे इस्लामी भाइयों उम्मीद करता हूं कि मेरे इस पोस्ट को पढ़कर आप समझ गए होंगे। बकरा ईद के मौके पर बकरा व अन्य जानवर की कुर्बनी कैसे दी जाती है। और कौन सी दुआ कुर्बानी करने में पढ़ी जाती है। मेरे इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा सोशल मीडिया नेटवर्किंग साइट पर शेयर करें। ताकि इस पोस्ट को पढ़कर हमारे प्यारे इस्लामी भाइयों को कुर्बानी देने की दुआ व अन्य जानकारी मिल जाए।

Post a Comment