हजरत बिलाल का इतिहास और किस्सा हिंदी में।

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हजरत बिलाल का इतिहास हिंदी में।

हजरत बिलाल का किस्सा हिंदी में


हजरत बिलाल कौन है:-दोस्तों आज हम आपको हजरत बिलाल रजि अल्लाहु ताआला अन्हु का हिंदी में इतिहास आज आपको बताने वाले हैं, जानकर आप की आंखों से आंसू बहने लगेगें। हजरत बिलाल एक गुलाम थे। गुलामी में उनके साथ इतनी बदसलूकी और जुल्म किए गए कि आम आदमी ऐसे जुर्म बर्दाश्त नहीं कर सकता। लेकिन अल्लाह के हबीब नबी ए करीम नबी सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम के सहाबा - ए - किराम हजरत बिलाल हब्शी ने जुल्म बर्दाश्त किये।

हजरत बिलाल पर जिस तरह के जुल्म किए गए उस तरह के जुल्म बर्दाश्त, अल्लाह के प्यारे नबी सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम का चाहने वाला ही कर सकता है।

हजरत बिलाल और हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो ताआला अलेही वसल्लम का दर्दनाक वाकया हिंदी में।

मेरे प्यारे इस्लामी भाइयों आज हम आपको हजरत बिलाल का दर्दनाक वाकया बताने वाले हैं जिसको पढ़ कर आपके आंखों से आंसू आने लगे। हजरत बिलाल पर बहुत ही ज्यादा दर्दनाक और दहशतनुमा जुल्म किए गए। हजरत बिलाल पर कैसे-कैसे जुल्म किए गए इनको जानने के लिए आर्टिकल को नीचे स्क्रॉल करके पूरा पढ़ें। आइए आगे बढ़ते की हजरत बिलाल पर उनके मालिक ने किस तरह के जुल्म किए जानते हैं।

प्यारे आका सल्लल्लाहो ताआला अलेही वसल्लम एक मर्तबा मक्का की गली से गुजर रहे थे। उस समय प्यारे आका सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम ने बहुत ही दर्दनाक और करहाट से भरी आवाज सुनी। प्यारे आका उस आवाज के सहारे वहां तक पहुंच गए जहां से वह आवाज आ रही थी। वहां पहुंचकर आका ने देखा कि वह आवाज एक दक्षिण अफ्रीका के आदिवासी की थी। वह आदिवासी कोई और नहीं बल्कि हजरत बिलाल रजि अल्लाहु अन्हु थे। आका ने पूंछा की क्या बात है आप क्यों रो रहे हैं। उस आदमी ने बताया कि मैं एक बंधुआ मजदूर हूं। और मेरा मालिक मुझ पर बहुत ही ज्यादा जुल्म करता है। कुछ देर सोचने के बाद मुस्तफा ने उस गुलाम से कहा कि मैं आपको इस गुलामी से आजाद नहीं करा सकता, लेकिन हां इतना जरूर है कि मैं कुछ मदद कर सकता हूं। प्यारे आका सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम को तो देखी उस गुलाम से कहा कि मैं आपकी कुछ मदद कर सकता हूं। वह गुलाम चक्की से अनाज पीस रहा था। मैं गुलाम दिन में अपने मालिक की बकरियों को चराता था और जब बकरी चरा कर घर वापस लौटता था तब उसका मालिक रात को एक बोरी अनाज उस गुलाम को पीसने के लिए देता था और पीते-पीते सारी रात ऐसे ही गुजर जाती थी। जब यह बात उसने प्यारे आका हुजूर सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम को बताएं तब आपने उस गुलाम की मदद करना चाही और गुलाम को रात को सोने के लिए कह दिया और सारी रात खुद ही आका ने चक्की पीसी। तो प्यारे इस्लामी भाइयों यह खूबी है, हमारे प्यारे आका हुजूर सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम की।


प्यारे आका हुजूर सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम तीन रोज तक ऐसे ही जाकर उस गुलाम की मदद करते रहे। एक रोज उस गुलामने प्यारे आका हुजूर सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम से पूछा कि आप कौन हैं जो मेरी मदद करने के लिए यहां पहुंच जाते हैं। प्यारे आका ने उस गुलाम स कहा कि तुमने मुस्तफा का नाम सुना है गुलाम ने कहा हां सुना है अल्लाह के नबी है मुस्तफा जो मदीने में लोगों को अपना कलमा पढते हैं और इस्लाम धर्म में शामिल करते हैं।

मेरे प्यारे आका ने  उस गुलाम से कहा कि वह मुस्तफा मैं ही हूं। इतना कहना था और उस गुलाम ने तुरंत कहा कि मुझे भी अपना कलमा पढ़ा दो। प्यारे आका ने हजरत बिलाल जो के गुलाम थे।  उनको भी अपना कलमा    ला इलाहा इल्लल्लाह मोहम्मद उर रसूल अल्लाह पढ़ा दिया।

जब यह बात हजरत बिलाल के मालिक को पता चली तब उसने हजरत बिलाल पर और ज्यादा जुल्म करने शुरू कर दिये। हजरत बिलाल पर जुल्म करते जाते थे,  और कहते जाते थे कि तू खाता हमारा है, और कलमा मुस्तफा का पड़ता है। प्यारे इस्लामी भाइयों हजरत बिलाल ने प्यारे आका मुस्तफा का कलमा पढ़ने पर अपने मालिक के इतने जुल्म सहे आज के समय में इतने जुल्म वही सह सकता है। जो प्यारे आका का गुलाम-ए-मुस्तफा हो।

हजरत बिलाल पर उनके मालिक के जुल्म इस तरह थे हजरत बिलाल को गर्म रेत पर लिटाया जाता था जो बिल्कुल एकदम गरम तांवे की तरह होती थी। और हजरत बिलाल के सीने पर भारी पत्थर रखा जाता था। एक बार जब हजरत बिलाल पर तीन चार लोग मिलकर उन को पीट रहे थे। यह सारा मंजर हजरत अबू बकर रजी अल्ला हू अन्हु  ने अपनी आंखों से देखा आप उधर से गुजर रहे थे। इस तरह का जुल्म देखकर हजरत अबू बकर रजी अल्लाहु अन्हु की आंखें नम हो गई।

आपने नजदीक जाकर उन पीटने वाले लोगों से जाकर कहा इस गुलाम को मैं खरीदना चाहता हूं। उन लोगों ने आपस में मशवरा करके हजरत अबू बकर रजी अल्लाह अनु को गुलाम कि ज्यादा से ज्यादा कीमत बताइए जो 50 दिरहम में थी। आपने फरमाया अगर तुम लोग इससे जुगनी जुगनी जुगनी कीमत भी मांगते तो मैं वह भी अदा कर देता। आपने कीमत चुका कर हजरत बिलाल को जो एक हप्सी थे दिखने में आजाद करा दिया। हजरत बिलाल को इसलिए हप्सी भी कहा जाता है। हजरत बिलाल ने कहा कि मुझे मदीने में मुस्तफा के पास पहुंचा दो मैं उनके पास रहना चाहता हूं उनकी गुलामी करना चाहता हूं। और इस तरह हजरत बिलाल हब्शी प्यारे आका हुजूर सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम के सहाबा इकराम हो गए उनकी सेवा करने लगे।

मेरे प्यारे इस्लामी भाइयों यह वाक्या मैंने बहुत ही रिसर्च और अपने मेहनत के बलबूते से पब्लिश किया है मैं चाहता हूं कि मेरे प्यारे इस्लामी भाइयों मेरे इस आर्टिकल को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। और मेरी वेबसाइट www.xyzhindi.com पर जाकर ऐसे ही जानकारी से भरपूर आर्टिकल को पढ़ते रहें।

                                           धन्यवाद।

                              फिर मिलेंगे अगले आर्टिकल 

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