आला हजरत कौन थे, जानें उनका विशाल कैसे हुआ,Who was Aala Hazrat in hindi.

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आला हजरत कौन थे, जानें उनका विशाल कैसे हुआ,Who was Aala Hazrat in hindi.

आला हजरत के मजार की फोटो दिखाइए



आला हजरत कौन थे।

आला हजरत इमाम अहमद रज़ा खान बरेलवी का जन्म 10 शव्वाल 1272 हिजरी ब मुताबिक 14 जून अट्ठारह सौ 56 ईसवी को 1 इल्मी घराने में हुआ था।


आपके पूर्वज शईद उल्ला खान कंधार के पठान थे। जो मुगलों के समय हिंदुस्तान आए थे। इमााम अहमद रजा बरेलवी को लोग आला हजरत के नाम से जानते हैं। आला हजरत बहुत बड़े मुफ्ती, आलीम, हाफिज, लेखक और शायर थे। 


उन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप के मुसलमानों के दिलों में हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम और अल्लाह ताआला के लिए लोगों के प्रेम भरकर हजरत मोहम्मद उर रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम की सुन्नतों को जीवित कर इस्लाम की सही रुह को पेश किया। आला हजरत के वालिद साहब ने अहमद रजा खान को 13 साल की उम्र में ही मुफ्ती घोषित कर दिया था। 70 से अधिक विषयों पर एक हजार से ज्यादा किताबें लिखी है। जिसमें उनकी प्रमुख पुस्तक अद्दौलतुल मक्किया है। जिसको उन्होंने केवल 8 घंटों में बिना किसी संदर्भ ग्रंथों की मदद से हरम शरीफ में लिखा।


आला हजरत, इमाम अहमद रजा खान बरेलवी को अपने विसाल (मृत्यु) की तारीख 4 महा 22 दिन पहले ही पता चल गई थी। आखिरी वक्त में उन्होंने सूरह यासीन की तिलावत की और कलमा-ए-तैय्यबा भी पढ़ा।


आला हजरत ने अपने अंतिम 2 घंटों में अपना वसीयतनामा भी तहरीर कराया।विसाल के वक्त उनके चेहरे पर खुशी के आसार नजर आ रहे थे।


आला हजरत का विसाल यानी कि इंतकाल 25 सफर 1340 हिजरी और अंग्रेजी महा के अनुसार 28 अक्टूबर सन 1921 ईसवी में 2:38 पर हुआ था।


आला हजरत फाजिले बरेलवी इमाम अहमद रजा खां 1339 ईस्वी में बीमारी की वजह से भवाली (नैनीताल) चले गए। वहां उन्होंने रमजान में बीमारी के चलते हुए रोजे रखे।भवाली में ही उन्होंने अपने तारीखे विसाल की खबर देते हुए। अपने हक में उन्होंने एक आयत तहरीर फरमायी।और उस आयत में ही उन्होंने 4 महीने 22 दिन पहले ही अपने विसाल की खबर दे थी।


भवाली में ही आला हजरत के पहलू में दर्द हुआ, जिसके वजह से वह बहुत कमजोर हो गए थे।


14 मोहर्रम को आला हजरत भवाली से बरेली शरीफ पहुंचे। कमजोरी की हालत में ही यह दीनी महफिलों में अपनी नसीहतें देते रहे। आखरी मजलिस में उन्होंने एक तकरीर फरमायी।


तकरीर में आला हजरत ने फरमाया के है प्यारे भाइयों मुझे मालूम नहीं कि मैं तुम्हारे अंदर कब तक रहूंगा। तीन ही वक्त होते हैं, बचपन,,जवानी और बुढ़ापा।


बचपन गया जवानी आयी,जवानी गई और बुढ़ापा आया।अब कौन सा चौथा वक्त आने वाला है, जिसका हमें और आपको इंतजार है। एक मौत ही बाकी है।


अल्लाह का कादिर है, कि ऐसी हजार मजलिस ए अता फरमाए और आप सब लोग हो और मैं आप सब लोगों को सुनाता रहूं। मगर बजाहिर इसकी उम्मीद नहीं।


ऐ प्यारे लोगों तुम प्यारे हुजूर नबी करीम नबी सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम की भोली भैड़ो हो।


भेड़िए तुम्हारे चारों तरफ है। वह चाहते हैं कि तुम्हें बहकाया जाए। वह चाहते हैं तुम्हें बहकयें और कितने में डाल दें।


जो तुम्हें जहन्नम में ले जाएं इनसे बचो दूर भागो। यह तुम्हारे ईमान की ताक में हैं।


ऐ मेरे प्यारे मुसलमान भाइयों इनके हमले से अपने ईमान को बचाओ।


आला हजरत ने अपने विसाल से 2 घंटा 17 मिनट पहले तजहीज और तदफीन(कफन दफन) से जुड़े जरूरी मसले लिखें। जिसमें 14 अहम बातें थी। इसके बाद उन्होंने कलम बंद कर दी। और 12:21 पर उन्होंने तहरीर लिखी और इसके बाद एक वसीयतनामा तहरीर करवाया।


जब 2:00 बजने में 4 मिनट बाकी थे, तब उन्होंने फरमाया घड़ी खोल कर सामने रख दो। इसके बाद उन्होंने फरमाया कि बुजु करके कुरान ए मजीद यानी कि कलाम पाक लेकर आओ। हुजूर मुफ्ती- ए- आजम हिंद से फरमाया कि सूर- ए- यासीन और सूर-ए- रअद की तिलावत करो।


जिस आयत में आपको सुनने में गलती नजर आई तो उस आयत की आपने खुद तिलावत करके बताई। उसके बाद अपने सफर की दुआ पढ़ी और कलमा-ए- तैय्यबा पूरा पढ़ा।


इसके बाद उनके चेहरे पर एक चमक नूर की आई और उनकी मुस्कुराहट बरकरार रही। और देखते ही देखते कुछ क्षणों में उनकी रूह परवाज़ कर गई।


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