विश्वकर्मा पूजा 2022 में कब है।vishvkarma Pooja 2022 me kab hai in hindi. 2022 में विश्वकर्मा पूजा कब है, विश्वकर्मा

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विश्वकर्मा पूजा 2022 में कब है।vishvkarma Pooja 2022 me kab hai in hindi.

2022 में विश्वकर्मा पूजा कब है, विश्वकर्मा पूजा 2022 में कब है। इसके बारे में हम संपूर्ण जानकारी लेकर हाजिर हुए अपने इस आर्टिकल में। अगर आपको मालूम नहीं है, कि विश्वकर्मा पूजा 2022 में कब है,तो इसके बारे में जानने के लिए आर्टिकल को ऊपर से नीचे तक स्क्रॉल करके पूरा पढ़ें।



विश्वकर्मा पूजा को विश्वकर्मा दिवस या जयंती के नाम से भी जाना जाता है। विश्वकर्मा पूजा या विश्वकर्मा दिवस को प्रत्येक वर्ष (हर साल) सितंबर माह में बहुत ही उल्लास के साथ मनाया जाता है।

विश्वकर्मा पूजा या जयंती को भारत के कर्नाटक, उड़ीसा, बिहार, असम, पश्चिमी बंगाल, झारखंड, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में हर साल ग्रेगोरियन तिथि सितंबर माह की 17 तारीख को मनाई जाती है।

संपूर्ण भारत में इस जयंती या पूजा को कारखानों कार्यालय एवं दफ्तरों में बहुत बड़े उत्सव के रूप में मनाते हैं।

भगवान विश्वकर्मा को विश्व का निर्माता एवं देवताओं का वास्तुकार माना जाता है। और इन्हीं के जन्मदिन के रूप में विश्वकर्मा पूजा मनाई जाती है।

विश्वकर्मा  या जयंती दिवस हिंदू कैलेंडर के अनुसार, हर साल कन्या संक्रांति पर पड़ता है।

इस दिन को लगभग पूरे भारत में विधि पुराण के हिसाब से मनाया जाता है। विश्वकर्मा दिवस के दिन सबसे बड़े वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है।

विश्वकर्मा पूजा को दफ्तरों और कार्यालयों में बहुत ही श्रद्धा के साथ मनाते हैं। लेकिन इसके साथ साथ  इंजीनियर,आर्किटेक्ट,वेल्डिंग की दुकान वाले, चित्रकार मैकेनिक या कारखानों में विश्वकर्मा पूजा को बहुत ही श्रद्धा पूर्वक मुख्य तौर पर मनाते हैं।

2022 में विश्वकर्मा पूजा की तारीख व मुहूर्त।

विश्वकर्मा पूजा 2022 में 17 सितंबर दिन शनिवार को है।

विश्वकर्मा पूजा के दिन दफ्तर-कार्यालयों और कारखानों में अच्छे से साफ सफाई होती है। और इस दिन भगवान विश्वकर्मा की मिट्टी की मूर्तियों को बहुत ही अच्छे से सजाया जाता है। घरों के अंदर भी लोग साफ सफाई करते हैं अपने इलेक्ट्रॉनिक सामान व मोटर बाइक और मैकेनिकल वस्तुओं को साफ सुथरा रखते हैं, और भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते हैं।

विश्वकर्मा पूजा कारखानों और दफ्तरों में क्यों की जाती है।

विश्वर्मा पूजा मुख्य रूप से कारखाने और दफ्तरों में मनाई जाती है।

विश्वकर्मा पूजा दफ्तरों और कारखानों में इसलिए की जाती है। क्योंकि इस दिन मिस्त्री लोग अपने औजारों की पूजा करते हैं। विश्वकर्मा पूजा के लिए किसी मंदिर को नहीं बल्कि दफ्तर या कारखाने में विश्वकर्मा दिवस मनाने के लिए तैयार किया है।

विश्वकर्मा दिवस के दिन औद्योगिक कारखाने के फर्श को पूजा के लिए मनाया जाता है ‌‌।

भारत में इस दिन को दफ्तर कार्यालय अथवा वेल्डिंग का वर्क करने वाले, कार्यालय ,शिल्पकार,यांत्रिकी, स्मिथ  बैलडर या फिटर के द्वारा इस दिन को बहुत बड़े उत्सव के रूप में मनाते हैं।


इस दिन सभी अपने उज्जवल एवं बेहतर भविष्य, सुरक्षित कामकाजी परिस्थितियों और सबसे बढ़कर अपने-अपने क्षेत्र में अपार सफलता की पूर्ती के लिए प्रार्थना करते हैं। श्रमिक विभिन्न मशीनों और औद्योगिक औजारों के सुचारू संचालन के लिए प्रार्थना करते हैं, भगवान् विश्वकर्मा के साथ साथ इस दिन औजारों की पूजा भी जाती है।


विश्वकर्मा जयंती (विश्वकर्मा) एक हिंदू भगवान जो एक दिव्य वास्तुकार हैं, के लिए उत्सव का दिन है, उन्हें स्वायंभु और सम्पूर्ण विश्व का निर्माता माना जाता है।वेदों में इस बात का वर्णन है की उन्होंने द्वारका के पवित्र शहर का निर्माण किया जहां भगवान श्री कृष्ण ने शासन किया। पांडवों की माया सभा से लेकर देवताओं के लिए कई शानदार हथियारों का निर्माण भगवान विश्वकर्मा द्वारा ही किया गया।


देवताओं द्वारा उन्हें एक दिव्य बढ़ई भी कहा जाता है। ऋग्वेद में इसका उल्लेख किया गया है, और इसे यांत्रिकी और वास्तुकला के विज्ञान, स्टैप्टा वेद के साथ श्रेय दिया जाता है। विश्वकर्मा की विशेष प्रतिमाएँ और चित्र सामान्य रूप से भी प्रत्येक कार्यस्थल और कारखानों में स्थापित की जाती हैं।सभी कार्यकर्ता एक विशेष जगह पर इकट्ठा होते हैं और भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते हैं।



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