अस्सलामु आलेकुम मेरे प्यारे भाइयों आज मैं आपके लिए फिर लेकर हाजिर हुआ हूं,एक नई पोस्ट। आज मैं अपनी इस पोस्ट में आपको सिखाने वाला हूं। आप जुमेरात के दिन अपने घर पर फातिहा कैसे पढ़ें। जुम्मे रात के दिन खाने पर फातिहा कैसे पढ़ें, फातिहो का इसाले सबाब कैसे पहुंचाएं। फातिहा पढ़ने का क्या तरीका है। इन सभी की जानकारी आज आपको हम अपने इस आर्टिकल में देने वाले हैं। जानने के लिए हमारे आर्टिकल को ऊपर से नीचे तक स्क्रोल करके पूरा पढ़ें।

फातिहा पढ़ने का तरीका हिंदी में।

जुम्मे रात के दिन फातिहा पढ़ने का तरीका हिंदी में


फातिहा पढ़ने से पहले बुजु करना बहुत ही जरूरी है, अगर आप बिना बुजु किए फातियां पढ़ते हैं,तो आपकी फातिहा को कुबूल नहीं होंगी। इसलिए फातिहा पढ़ने से पहले बुजु करना बहुत जरूरी है।

वजू करने के बाद जिस खाने पर फातिया करना है, उसको अपने सामने रखें और एक गिलास पानी रखने के साथ खाना खुला रखें और फातिया पड़े।

जुमेरात के दिन खाने पर फातिया कैसे पढ़ें।

जुम्मे रात के दिन आने पर साथिया पढ़ने के लिए सबसे पहले बुजु करना वाजिब है इसके बाद मुझे करके किबला की तरफ मुंह करके बैठ जाएं और खाना अपने सामने रखकर उसको खोल कर रखें और साथ में पानी रख दें।

अब सबसे पहले 3 मर्तबा दुरुद शरीफ पढ़ें। दुरुद शरीफ 3 मर्तबा पढ़ने के बाद 3 मर्तबा कुल्ल वल्लाहू अहद अल्लाहू समद यानी कि कुल पढें। 3 मर्तबा अल्हम्दु शरीफ पढ़े और इसके बाद आखिर में 3 मर्तबा दुरुद शरीफ पढ़े।

फातिया पढ़ने का यह सबसे आसान तरीका है। इस तरह हमारे बताए गए तरीके से आप अपने घर पर बहुत आसानी से जुम्मे रात के दिन खाने पर स पढ़ सकते हैं।

सूर: इखलास को फातिहा में 3 मर्तबा पढें।

बिस्मिल्लाह हिर्रहमा निर्रहीम


कुल हुवल लाहु अहद

अल्लाहुस समद

लम यदिल वलम यूलद

वलम युकुल लहू कुफुवन अहद।


अल्हम्दु शरीफ को 3 मर्तबा पढें।

अऊज़ो बिल्लाहे मिनश शैतानिर रजीम*बिस्मिल्ला हिर्रहमान निर्रहीम*

  • अल्हम्दु लिल्लाहे रब्बिल आलमीन*
  • अर्रहमान निर्रहीम*
  • मालिके यौमिद्दीन*
  • इय्याका नअबुदु वइय्याका नस्तईन*
  • इहदिनस सिरातल मुस्तक़ीम*
  • सिरातल लज़ीना अनअम्ता अलैहिम गै़रिल मग़दूबे अलैहिम वलद दॉल्लीन*

फातिहा की शुरुआत और आखिर में 3 मर्तबा दुरूद शरीफ पढ़ें।

दुरूद शरीफ हिंदी में,

अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिन व अला आलि मुहम्मदिन कमा सल्लैता अला इब्राहीम व अला आलि इब्राहीमा इन्नक हमीदुम मजीद, अल्लाहुम्म बारिक अला मुहम्मदिन व अला आलि मुहम्मदिन कमा बारक्ता अला इब्राहीमा व अला आलि इब्राहीमा इन्नक हमीदुम मजीद।


फातिहां पढ़ने के बाद फातिहों का सवाब कैसे पहुंचाते हैं।

फातिहा न पढ़ने के बाद उसका सवाब कैसे पहुंचाते हैं, आज आप जानेंगे हमारे इस आर्टिकल में। मेरे प्यारे इस्लामी भाइयों फातिहा पढ़ने के बाद उसका सवाब कैसे पहुंचाते हैं आज मैं आपको बताता हूं।

मैंने कलाम पाक की आयत ऊकियो तिलावत की है दुरूद ए पाक के साथ और भी आए थे मैंने पढ़िए अगर इनको पढ़ने में मेरी कोई गलती हो तो अल्लाह मुझे अपना बच्चा समझ कर उसको माफ फरमा। और मेरे द्वारा दी गई फातिहा को अपनी बारगाह में कुबूल फरमा इसका सबाब सबसे पहले प्यारे हुजूर नबी करीम सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम को इस फातिहों का सबाब पहुंचा। उसके बाद 1,24,000 पीर पैगंबर औलिया उससे कम या ज्यादा। जब से दुनिया शुरू हुई है, और जब तक खत्म होगी जितने पीर पैगंबर औलिया हैं उन सब की बारगाह में कलाम पाक की आयतों के सवाब को कुबूल फरमा। जिस खाने पर फातिहा दी हैं, जिसके घर पर दी हैं उसके बुजुर्ग गाने दीन का नाम लेकर जो मैंने  जो फातिहा पड़ी है। इस घर के बुजुर्गोंने दीन को इनका सवाब पहुंचा। ला इलाहा इल्लल्लाह मोहम्मद उर रसूल अल्लाह।


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