जुम्मे की नमाज़ की नियत कैसे करें, जुम्मे की नमाज कैसे पढ़ते हैं, जुमे की नमाज के ख़ुत्बे से होती है या नहीं इन सभी बातों पर आज गौर करेंगे, इस आर्टिकल में। 

जुम्मे की नमाज़ की नियत कैसे करें


जुमे की नमाज कैसे पढ़ते हैं यह जानने के लिए आर्टिकल को शुरू से स्क्रोल करके नीचे तक पढ़े। आज आपको बिल्कुल सही जानकारी हिंदी में उपलब्ध कराई जाएगी। 


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जुम्मे की नमाज़ की नियत इमाम के पीछे कैसे करें।

जुम्मे की नमाज़ की नियत इमाम के पीछे कैसे करते हैं आज हम आपको हिंदी में बताएंगे।

जुम्मे का दिन मुसलमान के लिए बहुत ही आलादिन है। इस दिन प्यारे मुसलमान भाई नहा धोकर अच्छे कपड़े पहन कर जुमे की नमाज अदा करते हैं। अल्लाह की बारगाह में जुमे की नमाज का बहुत बड़ा सवाब है। 

मुसलमान भाइयों पर एहसान है, मोहम्मद मुस्तफा का क्योंकि मोहम्मद मुस्तफा की उम्मत में जो पैदा हुआ है। वह खुशनसीब है। प्यारे हुजूर नबी ए करीम नबी सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम ने अपनी उम्मत के लिए पांच वक्त की नमाज अल्लाह ताला से मांगी। 


और अल्लाह ने हुजूर की यह बात ना टाली जो किसी वक्त में 70 वक्त की नमाज हुआ करती थी। प्यारे नबी ए करीम नबी सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम की दुआ पर अल्लाह ने 70 वक्त की नमाज को पांच वक्त में तब्दील कर दिया। 


इसलिए ही तो कहा जाता है, कि नबियों में सबसे आला नबी मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो ताआला अलेही वसल्लम है, और इनको आखरी और पहले नबी होने का मुकाम भी हासिल है। 

पहले नबी होने का मर्तबा मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम को इसने हासिल है, क्योंकि इस दुनिया से पहले ही हमारे नबी का नूर दुनिया में आ गया था। 

आखरी नवी होने का मर्तबा इसलिए हासिल है,क्योंकि हमारे नबी सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम के बाद दुनिया में कोई दूसरा नबी ना होगा।

आइए अब बात करते हैं, कि इमाम के पीछे जुम्मे की नमाज़ की नियत कैसे करें।

जब मस्जिद के इमाम साहब मुसल्ले पर नमाज पढ़ाने के लिए खड़े हो जाएं। 

तो इस तरह नमाज़ की नियत पढ़ें:-

नियत करता हूं नमाज की, नमाज पढ़ता हूं वास्ते अल्लाह ताआला के, 2 रकात नमाज फर्ज, पीछे इस इमाम के, मुंह मेरा तरफ काबे शरीफ को, अल्लाह हू अकबर।

जुम्मा(Jumma) क्या है।

प्यारे इस्लामी भाइयों अब सवाल उठता है, कि जुम्मा क्या है। आज मैं आपको बताऊंगा की जुम्मा क्या है और इसका एक मुसलमान के लिए कितना मर्तबा है आज इन सभी बातों पर हम गौर करेंगे अपने इस आर्टिकल में। आइए जानते हैं, जुम्मा क्या है।

जुम्मे का दिन मुसलमान भाइयों के लिए ईद से कम नहीं है। जुम्मे का दिन सप्ताह में एक बार आता है।

और इस दिन प्यारे मुसलमान भाई बहुत ही उत्साह के साथ नहा धोकर गुस्ल करके अच्छे कपड़े पहनकर मस्जिद में जुमे की नमाज अदा करने के लिए दाखिल होते हैं। जुम्मे का दिन बहुत ही फजीलत वाला दिन है। इस दिन को छोटी ईद भी कहते हैं।

जुमे की नमाज को कज़ा करना नहीं चाहिए क्योंकि मेरे प्यारे इस्लामी भाइयों जुम्मा बहुत ही फजीलत वाला दिन है। हदीस की रोशनी में इस बात का जिक्र किया गया है कि अगर किसी वाली से जुम्मे की नमाज छूट जाती है और वह लगातार 3 जुमे छोड़ देता है रब्बे इस्लाम को छोड़ देता और काफिरों की लिस्ट में दाखिल हो जाता है। अब आप समझ गए होंगे कि जुम्मे का दिन मुसलमानों के लिए एक त्योहार से कम नहीं होता है।


जुम्मे की नमाज छूट जाए तब हदीस की रोशनी में की क्या सजा है इस्लाम के दायरे में इसकी सजा क्या है यह सब और हम आपको अपने इस लेख में बतायगें।

हजरत अब्दुल्लाह बिन उमर और हजरत अबू हुरैरह ने हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम को फरमाते हुए सुना आप मेंबर की सीढ़ियों पर यह फरमा रहे थे कि खबरदार हो जाए वह लोग जो जुमे की नमाज छोड़ते हैं। वरना अल्लाह ताला उनके दिलों पर मोहर लगा देंगे। और वह गफिलीन में से हो जाएंगे।

जुमे की नमाज का समय हिंदी में।

जुमे की नमाज जोहर की नमाज के बदले में पढ़ी जाती है। क्योंकि जुमे की नमाज के बाद जोहर की नमाज नहीं होती है। जुम की नमाज का समय मस्जिदों में अलग अलग होता है। 12:30 से मस्जिद में अजान लगना शुरू हो जाती है और 1:30 तब मस्जिदों में अजान होती है। 15 से 30 मिनट तक खुतबा करने के बाद जमात खड़ी हो जाती है।

जुमे की नमाज में खुतबा जरूर होता है,अगर जुमे की नमाज में खुतबा नहीं पढ़ाया जाता तो आप की नमाज मुकम्मल नहीं है।


जुम्मे की कितनी रकात नमाज है।

जुम्मे की कितनी रकात नमाज है इसकी बिल्कुल सही और सटीक जानकारी हम आपको अपने इस आर्टिकल  में उपलब्ध कराने वाले हैं। अक्सर लोग इंटरनेट पर सर्च करते रहते हैं कि जुमे की नमाज कैसे पढें । अगर आप भी ऐसा गूगल पर सर्च करते तो आज आप बिल्कुल सही पोस्ट पढ़ रहे हैं यहां मैं आपको बहुत ही आसान शब्दों में यह बताने वाला हूं कि जुम्मे की कितनी रकात नमाज होती है।

तो आइए जानते हैं कि जुम्मे की कितनी रकात नमाज है वह हर मुसलमान भाई पर फर्ज है यहां तक की 10 साल के उम्र के बच्चे पर भी नमाज फर्ज है।


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