उत्तर प्रदेश:जानवरों में कौन सी बीमारी फैल रही है, जानवरों में फैल रही बीमारी का नाम है लंपी वायरस, जिसकी वजह से परेशान है पशुपालक।

आजकल जानवरों में एक ऐसी बीमारी फैल रही है, जिसकी वजह से प्रदेश के पशु पालक परेशान हैं। एक तरफ अभी हाल ही में इंसानों में जो वायरस फैला था जिसका नाम कोरोनावायरस था उसकी वजह से इंसान अभी-अभी उभर कर आया है। और अब एक दूसरा वायरस जो जानवरों में काफी तेजी से फैल रहा है। उसी लंबी स्किन वायरस की वजह से प्रदेश के पशु पालक बहुत ही चिंतित हैं।

गायों में फैल रहा लंपी स्किन वायरस


आप सभी जानते हैं कि इंसानों में कोरोनावायरस ने बहुत ही ज्यादा आक्रमण किया जिसकी वजह से दुनिया भर में बहुत सारी मौतें हुई। अब जानवरों में भी एक ऐसा वायरस पनप चुका है,जो उड़ीसा, छत्तीसगढ़,राजस्थान,सहित उत्तर प्रदेश आदि प्रदेशों में फैल चुका है। और इस वायरस का नाम लंपी स्किन वायरस बताया जा रहा है।

यह लंपी वायरस गाय, बैल आदि पशुओं को संक्रमित कर रहा है और इसके चलते संक्रमित पशुओं की मृत्यु हो रही है। इसमें सबसे ज्यादा आंकड़ा गोवंश का है।

लंपी वायरस क्या है।

लंपी वायरस क्या है, इसके बारे में लोग गूगल पर सर्च कर रहे हैं,अगर आपने भी कुछ ऐसा ही सर्च किया है तो आप बिल्कुल सही पोस्ट पढ़ रहे हैं। इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपको किसी अन्य पोस्ट पर जाने की जरूरत नहीं होगी। जानने के लिए आर्टिकल को पूरा पढ़ें।

आप को भी मालूम होगा जहां एक तरफ देशभर में इंसानों में कोरोनावायरस का कहर बरप रहा है, वहीं दूसरी ओर जानवरों में भी एक वायरस बहुत तेजी से फैल रहा है।

उकत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में लंपी स्किन नामक वायरस पशुओं में बहुत तेजी से फैल रहा है। इस वायरस की चपेट में गाय बैल सहित अन्य पशु भी आ रहे हैं। यह वायरस बिल्कुल कोरोनावायरस जैसे ही है। संक्रमित पशु के संपर्क में आने पर अन्य पशु को भी लंबी स्किन वायरस अपनी चपेट में ले लेता है। इस वायरस का सबसे ज्यादा असर गायों में दिखाई दे रहा है। प्रतिदिन गायों की मौतों का सिलसिला जारी है। इसे देखते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं ने डीएम को ज्ञापन दिया और पशुओं में लंपी स्किन वायरस की रोकथाम के लिए कलेक्टर से प्रार्थना की है।

कलेक्टर से शिकायत कर भाजपा कार्यकर्ताओं ने लंपी स्किन वायरस की रोकथाम के लिए की मांग।

आज सुबह 11:00 बजे कलेक्टर परिसर में एकत्र होकर भाजपा कार्यकर्ताओं ने पशुओं में पनप रहे लंबी स्किन वायरस की रोकथाम के लिए कलेक्टर को ज्ञापन देकर की मांग।

चिंता की बात यह है कि अभी तक पशुओं में फैल रहे लंपी स्किन वायरस का (डोज) दवा नहीं बनी है। जो शहर में चिंता का विषय है। शहर सहित अन्य आसपास के इलाकों में भी इस बात से किसान चिंतित हैं। पशुओं में फैल रही यह बीमारी उत्तर प्रदेश सहित अन्य प्रदेशों में भी भयंकर रूप धारण कर चुकी है। राजस्थान के बाड़मेर जिले में इस बीमारी ने भयंकर रूप धारण कर लिया है, जहां प्रतिदिन मृत्यु होने वाले पशुओं की संख्या में इजाफा हो रहा है।

यह बीमारी पशुओं में उड़ीसा से होती हुई छत्तीसगढ़ व अन्य प्रदेश जैसे उत्तर प्रदेश राजस्थान गुजरात आदि राज्यों में फैल चुकी है।

यूपी में लंपी स्किन वायरस का कहर जारी।

उत्तर प्रदेश समेत कई राज्य इन दिनों लंपी वायरस का भयंकर कहर झेल रहे हैं। दुग्ध उत्पादन वाले जानवर खासतौर गायों पर इसकी मार ज्यादा पड़ी है। इस वायरस पर रिसर्च करने वाली आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय की वेटरनरी साइंस की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ विभा यादव की मुताबिक यूपी के 21 जिलों में ही 12 हजार से अधिक लंपी वायरस के मामले सामने आए हैं। इसके चलते 85 गायों की मौत भी दर्ज की जा चुकी है।

गायों में लंपी वायरस का संक्रमण ज्यादा।

लंपी वायरस डिजीज की सबसे ज्यादा शिकार गायें हो रही हैं। भैंसो में इसका संक्रमण न के बराबर है।इस वायरस से संक्रमित पशुओं के नाक और मुंह से पानी व लार गिरने लगती है।तेज बुखार होता है,और ऐसे जानवर भोजन छोड़ देते है। ऐसे पशुओं की चमड़ी के नीचे पहले छोटे-छोटे दाने हो जाते हैं। यह दाने घाव में बदल जाते हैं।यह अधिकतर मवेशियों के मुंह , गर्दन और गुप्तांग के पास पाए जाते हैं।

कैसे करें लंपी वायरस से पशुओं का बचाव।

लंपी वायरस से किस तरह अपने पशुओं को बचाया जाए। नीचे हम आपको कुछ टिप्स बता रहे हैं जिनकी मदद से आप लंपी वायरस के संक्रमण से अपने पशु को बचा सकते हैं।

लंपी वायरस से पशु को बचाने के टिप्स:-

इस वायरस से बचने के लिए सबसे पहले अपने पशुओं का टीकाकरण जरूर कराएं। किसी भी मवेशी में लंपी वायरस से संबंधित लक्षण मिले तो तुरंत स्थानीय पशु चिकित्सक से संपर्क करें। इसी के साथ संक्रमित पशु को अन्य पशुओं से अलग कर उसकी साफ सफाई की विशेष व्यवस्था करें।इस बात का ध्यान दें कि मक्खी और मच्छर संक्रमित मवेशी पर न बैठने पाए।


बता दें कि मक्खी और मच्छर जब संक्रमित पशु पर बैठेंगे तो वह अन्य स्वस्थ्य पशुओं पर भी बैठकर उन्हें संक्रमित कर सकते हैं। यही नहीं ऐसे संक्रमित पशुओं की यदि मौत होती है तो उसे गहरे गड्ढे में दफनाना चाहिए और ऊपर से चूना डालकर मिट्टी डालनी चाहिए जिससे संक्रमण और अधिक न फैल सके।

दोस्तों उम्मीद करता हूं मेरे द्वारा दी गई यह जानकारी आपके लिए बहुत ही ज्यादा हेल्पफुल होगी। जानकारी अगर अच्छी लगे तो कमेंट करना ना भूलें और हमारे इस आर्टिकल को ज्यादा से ज्यादा सोशल नेटवर्किंग साइट पर शेयर करें।




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