हरी मटर की खेती कैसे करें,green pea ki kheti kaise karein in hindi.

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हरी मटर की खेती कैसे करें,green pea ki kheti kaise karein in hindi.

हरी मटर की खेती कैसे करें


हरी मटर की खेती कैसे करें। अगर आप भी ऐसा सोचते हैं या गूगल यूट्यूब पर ऐसा कुछ सर्च करते हैं तो यह पोस्ट आपके लिए बहुत ही काम में आने वाली है दोस्तों आज मैं इसी टॉपिक पर अपना ही आर्टिकल लिख रहा हूं और आर्टिकल लिखने का सिर्फ सिर्फ मेरा यही उद्देश्य है कि मेरे इस पोस्ट को पढ़कर जो भाई हैं मटर की खेती करना चाहते हैं और उन्हें इसकी नॉलेज नहीं है तो वह मेरा यह आर्टिकल पढ़कर बहुत ही आराम से अपनी मटर की खेती कर सकते हैं और लाभ पा सकते हैं।

हरी मटर की खेती कैसे करते हैं।green pea ki kheti kaise karate hain in hindi.

हरी मटर की खेती कैसे करते हैं इसके बारे में आज हम आपको विस्तार से बताएंगे। आप इस आर्टिकल को पढ़कर बहुत ही आसानी से हरी मटर की खेती कर सकते हैं और लाभ कमा सकते हैं जानने के लिए आर्टिकल को शुरू से आखिर तक पूरा स्क्रॉल करके पढ़ें।

हरी मटर जिसको लोग भारत में सिर्फ मटर के नाम से भी जानते हैं। सब्जियों में हरी मटर एक अपना अलग स्थान रखती है दोस्तों यह एक ऐसी सब्जी है जिसको किसी भी सब्जी के साथ मिक्स करके बनाया जा सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में हरी मटर की खेती सिर्फ मटर की हरी फली के लिए की जाती है। हरी मटर का प्रयोग कई सारी सब्जियों में किया जाता है जैसे हरी मटर किसी भी सब्जी के साथ मिक्स करके बनाई जा सकती है और हरी मटर का उपयोग सूप बनाने आदि में किया जाता है।

भारत में हरी मटर का उत्पादन किस किस राज्य में होता है।

भारत में जिन राज्यों में हरी मटर का उत्पादन किया जाता है, उनको निम्न दर्शाया गया है:-भारत-कर्नाटक, मध्यप्रदेश, राजस्थान,पश्चिम बंगाल,असम,हरियाणा, उत्तर प्रदेश,उत्तराखंड,हिमाचल प्रदेश,बिहार और उड़ीसा।

हमारे स्वास्थ्य में हरी मटर के लाभ :-  हरी मटर का हमारे स्वास्थ्य के लिए क्या उपयोग है,यह हम जानेंगे अपने इस आर्टिकल के माध्यम से।

  • हरी मटर का प्रयोग शरीर के वजन को कम करने में किया जाता है।
  • हरी मटर शरीर में रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करती है।
  • हरी मटर का प्रयोग चेहरे की झाइयों और अल्जाइमर, गठिया, ब्रोंकाइटिस आदि में किया जाता है।
  • हरी मटर एंटी एजिंग और मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली एवं उच्च ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है।
  • वैज्ञानिकों का मानना है, कि हरी मटर का ज्यादा सेवन पेट के कैंसर को रोकने में सक्षम है।
  • हरी मटर का सेवन पेट की पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में सक्षम माना गया है।
  • हरी मटर का अधिक सेवन चेहरे पर निखार उत्पन्न करता है।
भारत में हरी मटर को कौन-कौन से नाम से जाना जाता है।
भारत में हरी मटर को कौन कौन से नाम से जाना जाता है। हरी मटर को भारत में जिस जिस नाम से जाना जाता है,उसको हमने नीचे दर्शाया है।
भारत:-मुत्तर (हिंदी में),बटाडी (कन्नड़ में), मटर (मराठी),  भटानी (तेलुगू में), पटरानी (तमिल में), बारा मटर (बंगाली में),
पाचा पटानी (मलयालम में), मतारा (उडिया में) मटर पंजाबी में।

हरी मटर की खेती कैसे की जाती है।

हरी मटर की खेती कैसे की जाती है


हरी मटर की खेती करने के लिए हमें किस-किस चीजों की आवश्यकता होगी।यह हम आपको बताने वाले हैं, अपने अपने इस आर्टिकल के माध्यम से।

हरी मटर की खेती करने के लिए हमें कई चीजों पर विशेष ध्यान देना होता है जैसे सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य यह होना चाहिए कि जहां पर हम हरी मटर की खेती कर रहे हैं वहां की जलवायु कैसी है इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए। जिन इलाकों में हरी मटर की खेती की जाती है वहां जलवायु क्षेत्र ठंडा होना बहुत ही अच्छा होता है। ठंडे और नम क्षेत्रों में हरी मटर की खेती बहुत ही अच्छी उत्पन्न होती है। हरी मटर की खेती करने के लिए जो तापमान निर्धारित किया गया है वह 10 डिग्री सेल्सियस से 25 डिग्री सेल्सियस तक है। अगर 25 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान है तो उस क्षेत्र में हरी मटर की खेती खराब हो सकती है। हरी मटर की खेती के लिए कृषि भूमि नम होनी चाहिए जो कि बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है हरी मटर की खेती के लिये। हरी मटर की खेती के नियम छिड़काव जैसी वर्षा की अधिक आवश्यकता होती है।

हरी मटर की खेती के लिए मिट्टी की आवश्यकता।

हरी मटर की खेती करने के लिए सबसे अहम और मुख्य कृषि भूमि होती है। हरी मटर की खेती वैसे तो कई तरह की मिट्टी में की जा सकती है लेकिन 6 से 8 पीएच मान की मिट्टी इसकी खेती के लिए विशेष है। जिस मिट्टी में हरी मटर की खेती करने के लिए जा रहे हैं, उसमें अच्छे कार्बनिक पदार्थ मिक्स करें। इससे मटर की खेती बहुत अच्छी उत्पन्न होती है। जिस भूमि में आप हरी मटर की खेती कर रहे हैं, उसमें सड़ गोबर का खाद डालकर मिट्टी को मिक्स करें। हरी मटर की खेती करने के लिये जो जो मिट्टी आपने तैयार की है उसमें किस किस पोषक तत्वों की कमी है,यह जानने के लिए मिट्टी को चेक करें। मिट्टी को चेक करने के बाद ही हरी मटर की खेती का बीज उसमें डालें।

हरी मटर की खेती करने के लिए बीज दर क्या होना चाहिए।

हरी मटर की खेती करने के लिए बीज दर क्या होना चाहिए यह एक मुख्य बात है। हरी मटर की खेती करने के लिए 20 से 30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर कृषि वैज्ञानिकों ने दर रखी है।

हरी मटर की उन्नत खेती करने के लिए बीजों की उपचारिता बहुत जरूरी है। हरी मटर के बीजों को राईजियम कल्चर से उपचारित करना चाहिए।

हरी मटर की खेती के लिए बुवाई का तरीका।

हरी मटर की खेती करने के लिए बुवाई का क्या तरीका होता है इसके बारे में हम आपको विस्तार से समझाइए कि किस तरह हरी मटर की खेती की जाती है।

जब भी आप हरी मटर का बीज बोलने के लिए तैयार करें तो सबसे पहले आपको यह करना चाहिए कि हरी मटर के बीजों को रात भर पानी में भिगोए रखें। इससे यह फायदा होता है कि बीज को अंकुरित होने में बहुत ही कम समय लगता है। हरी मटर की बुवाई करने के लिए क्षेत्र की जलवायु पर निर्भर करता है। कि किस समय किस क्षेत्र में हरे मटर की बुवाई की जाए यह उसके मौसम के अनुसार होता है। भारत में मैदानी क्षेत्रों में हरी मटर की बुवाई अक्टूबर माह की शुरू से नवंबर माह की आखिर तक होती है। जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में हरी मटर की बुवाई मार्च माह से मई माह तक की जाती है। मैदानी क्षेत्रों में हरी मटर की बुवाई 1 नवंबर के सप्ताह तक को प्राथमिकता दी गई है।

दोस्तों मैं उम्मीद करता हूं कि मेरा ही आर्टिकल आपके लिए बहुत ही लाभदायक पूर्व साबित होगा। इस आर्टिकल को पढ़कर आपको जरूर जानकारी प्राप्त होगी और अगर आपको ऐसा लगता है कि इससे हमें जानकारी प्राप्त हुई है तो हमारे इस आर्टिकल को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और कमेंट करना ना भूलें।








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